छत्तीसगढ़

सुशासन तिहार : छत्तीसगढ़ में जन-भागीदारी और विकास का नया अध्याय

जशपुर। लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली नींव जनता का भरोसा होता है। सरकारें कितनी भी योजनाएं बना लें या बजट आवंटित कर दें, उनकी सफलता तभी मापी जा सकती है जब आम नागरिक को उसका सीधा लाभ मिले। इसी उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ जैसे अनूठे अभियान की शुरुआत हुई है, जो शासन और प्रशासन को सीधे आम आदमी की दहलीज तक ले जा रहा है।

शासन और जनता के बीच सीधा संवाद

1 मई से 10 जून तक चलने वाला यह 40 दिवसीय अभियान केवल सरकारी दौरा नहीं है, बल्कि यह संवाद और समाधान का एक सशक्त जरिया है। इस दौरान प्रशासनिक मशीनरी शहरों के वार्डों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक पहुंच रही है। इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अधिकारी अब फाइलें देखने के बजाय सीधे लोगों की परेशानियों को सुनकर उनका मौके पर निराकरण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री की सक्रिय भागीदारी

इस अभियान को गति प्रदान करने में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भीषण गर्मी और विपरीत मौसम के बावजूद उनका गांवों में जाकर लोगों से सीधी बातचीत करना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक बड़ा उदाहरण है। यह दर्शाता है कि नेतृत्व न केवल नीतियों के निर्माण में, बल्कि उनके जमीन पर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

संवेदनशीलता और व्यवहार में बदलाव

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक स्पष्ट मंत्र दिया है—‘जनता की सुनें, उन्हें अपना व्याख्यान न सुनाएं’। उन्होंने जोर देकर कहा है कि जब कोई नागरिक अपनी समस्या लेकर कार्यालय आए, तो उसे सम्मान और शालीनता का अनुभव होना चाहिए। प्रशासनिक व्यवहार ही सरकार की छवि गढ़ता है, इसलिए अधिकारियों को धैर्य और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

समाधान शिविरों की सफलता

इस अभियान की धुरी ‘समाधान शिविर’ हैं, जो पंचायत और वार्ड स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का समन्वय अद्भुत है। स्थानीय स्तर पर आवेदन प्राप्त कर उनका त्वरित निराकरण होने से आम लोगों का सरकारी तंत्र पर भरोसा बढ़ा है।

भविष्य की राह

‘सुशासन तिहार’ की सफलता इसके तात्कालिक परिणामों के साथ-साथ इसकी निरंतरता पर भी टिकी है। यदि यह संवाद और सक्रियता की प्रक्रिया भविष्य में भी बनी रहती है, तो यह लोकतंत्र को और अधिक मजबूत करेगी। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु मजबूत हो, तो विकास का मार्ग न केवल सुगम होता है, बल्कि अधिक समावेशी भी बनता है।

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