टॉप न्यूज़

वैश्विक संकट से बढ़ा आयात का बोझ : पेट्रोलियम कंपनियों को मिली ₹1.23 लाख करोड़ की सरकारी राहत, उर्वरक सब्सिडी दोगुनी करने की मांग

नई दिल्ली (एजेंसी)। ईरान में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और खाद के आयात पर होने वाले खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई बाहरी चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। हालांकि, देश के भीतर मजबूत घरेलू मांग के चलते आर्थिक विकास की रफ्तार अभी भी सुरक्षित है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उछाल को देखते हुए उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए तय बजट राशि में 100 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी की मांग की है, जबकि आम बजट में इसके लिए पहले ही ₹1.77 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया था।

ईरान संकट के दौरान आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 78 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे थे। इस दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने इन कंपनियों को ₹1.23 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता दी है। हालांकि, अब कंपनियों ने धीरे-धीरे कीमतों में बदलाव करना शुरू कर दिया है, लेकिन वैश्विक दरों की तुलना में कम दाम पर ईंधन बेचने के कारण उन्हें अब भी रोजाना करीब ₹650 करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है।

आर्थिक मोर्चे से राहत भरे संकेत

मजबूत विकास दर: सूत्रों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष (2025-26) की आखिरी तिमाही में आर्थिक विकास की जो रफ्तार देखी गई थी, वह चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी बरकरार है।

बेहतर आंतरिक आंकड़े: देश में जीएसटी का संग्रह शानदार रहा है। इसके साथ ही बिजली की खपत, निर्यात और प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) के आंकड़े भी बेहद सकारात्मक हैं। निजी क्षेत्र की ओर से होने वाले निवेश में भी तेजी देखी जा रही है।

समीक्षा की तैयारी: सरकार अप्रैल-जून तिमाही के अंतिम नतीजों और मानसून पर अल-नीनो के प्रभाव का आकलन करने के बाद, आगामी जुलाई महीने में आर्थिक स्थिति की एक बार फिर व्यापक समीक्षा करेगी।

कर्ज का दबाव नहीं और विनिवेश से उम्मीदें

राहत की बात यह है कि सरकार ने बजट तैयार करते समय ही अंतरराष्ट्रीय बाजार के इस उतार-चढ़ाव का अनुमान लगा लिया था। यही वजह है कि मौजूदा संकट के बावजूद सरकार को बाजार से अतिरिक्त कर्ज लेने या संसद के मानसून सत्र में अनुपूरक मांगें लाने की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है। देश का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) अभी भी बजट में तय किए गए 4.3% के लक्ष्य के भीतर है।

दूसरी ओर, विनिवेश (Disinvestment) के मोर्चे पर दीपम (DIPAM) और सार्वजनिक उद्यम विभाग मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं। सरकार को पूरा भरोसा है कि वह इस साल विनिवेश के जरिए तय किए गए ₹80,000 करोड़ के लक्ष्य को पार कर लेगी, जिसमें आईडीबीआई (IDBI) बैंक की हिस्सेदारी बेचना भी शामिल है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button