छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ की महिलाएं स्वदेशी राखियों से लिख रही हैं आर्थिक स्वावलंबन की नई गाथा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले स्थित किशुन नगर ग्राम पंचायत की महिलाएं स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से राखियां तैयार कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) से जुड़ी ‘जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह’ की 12 महिला सदस्य स्थानीय एवं कम लागत वाले संसाधनों का उपयोग कर आय के नए स्रोत बना रही हैं।
प्राकृतिक संसाधनों और रचनात्मकता का अनूठा संगम
यह समूह राखी निर्माण में मुख्य रूप से घर पर आसानी से उपलब्ध चीजों का उपयोग करता है:
घरेलू अनाज एवं बीज: चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े (कद्दू) के बीजों को आकर्षक रंगों में रंगकर राखियों के डिजाइन तैयार किए जाते हैं।
सजावटी सामग्री: डिजाइन को पूरा करने के लिए आवश्यकतानुसार रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामान बाजार से खरीदे जाते हैं।
लागत में कमी: प्राकृतिक और घरेलू सामग्री के उपयोग से लागत न्यूनतम रहती है, जिससे प्रति राखी मुनाफा बढ़ जाता है।
सीजनल व्यवसाय से वर्षभर आय का सृजन
समूह की सदस्य सोनाली सिंह, दीप्ति चौधरी और आशा रवि के अनुसार, यह समूह पिछले तीन वर्षों से मौसम और त्योहारों के अनुसार अपने कार्य बदलता रहता है।
बिक्री के साधन: तैयार राखियों को विभिन्न स्थानों पर छोटे स्टॉल लगाकर और सीधे घरों से बेचा जा रहा है। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर उत्पादन बढ़ा दिया जाता है।
कौशल और आत्मविश्वास: बिहान योजना के तहत मिले प्रशिक्षण और सहयोग से महिलाओं को घर से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का अवसर मिला है।
सरकारी योजनाओं का मिला संबल
समूह की सदस्यों ने आजीविका के नए अवसर प्रदान करने और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।
किशुन नगर की महिलाओं की यह पहल यह साबित करती है कि यदि सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं का सही समन्वय हो, तो स्थानीय संसाधन ही महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वावलंबन का सबसे मजबूत जरिया बन सकते हैं।
















