हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत-जापान की विशेष रणनीतिक साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण : पीएम मोदी

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और जापान के बीच की विशेष रणनीतिक व वैश्विक साझेदारी को हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा उससे आगे शांति, सुरक्षा और समृद्धि का मुख्य आधार बताया है। भारत दौरे पर आए जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोईजुमी से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
बैठक और बातचीत के मुख्य बिंदु:
रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन पर बल: प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जापानी कंपनियों को भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के साथ रक्षा उपकरणों के सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन (Co-production) का न्योता दिया।
शीर्ष वार्ता की निरंतरता: पीएम मोदी ने जुलाई 2026 में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ हुई वार्ता को याद करते हुए दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे रक्षा सहयोग की सराहना की।
जापान की प्रतिबद्धता: जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोईजुमी ने रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी और भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राजनाथ सिंह और कोईजुमी के बीच द्विपक्षीय वार्ता:
जापानी रक्षा मंत्री ने भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी विस्तृत बातचीत की। उन्होंने इस बैठक को बेहद फलदायी बताते हुए कहा कि वे इन वार्ताओं को ठोस परिणामों में बदलने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
समुद्री सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर (MOU):
दोनों देशों ने रक्षा और समुद्री सहयोग को नया आयाम देने के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:
समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच सूचना साझाकरण और समन्वय बढ़ाना।
सझा अभियान व सहायता: खोज एवं बचाव (SAR) तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के क्षेत्रों में परिचालन सहयोग को मजबूत करना।
एकतरफा दबाव का विरोध: संयुक्त बयान में दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया और बल प्रयोग या दबाव के माध्यम से यथास्थिति बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध किया।
















