सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने ‘कलश वंदन यात्रा’ का हुआ शुभारंभ, संत रविदास के चरण स्थलों का होगा जीर्णोद्धार

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘समरसता संकल्प अभियान’ और ‘कलश वंदन यात्रा’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने संत रविदास महाराज की जन्मस्थली काशी (वाराणसी) से लाए गए पवित्र कलशों का पूजन किया और उन्हें राज्य के विभिन्न संभागीय प्रतिनिधियों को सौंपा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश भर में सामाजिक सद्भाव और एकता को सुदृढ़ करने का कार्य किया जा रहा है। जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर सर्वसमाज को एक सूत्र में पिरोना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
“संत रविदास जी ने अपने विचारों और भक्ति भाव से पूरे समाज को जोड़ने का संदेश दिया। प्रदेश सरकार उन सभी पवित्र स्थलों का कायाकल्प करेगी, जहाँ संत रविदास जी के चरण पड़े थे।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
तीर्थ स्थलों का विकास और सांस्कृतिक सम्मान
मुख्यमंत्री ने राज्य में संत परंपरा को सहेजने के लिए कई घोषणाएं और उल्लेख किए:
सागर का भव्य स्मारक: सागर में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास जी का एक भव्य मंदिर और स्मारक तैयार किया जा रहा है, जिसका लोकार्पण जल्द ही प्रधानमंत्री के हाथों कराया जाएगा।
उज्जैन में भूमि-पूजन: उज्जैन में संत रविदास जी और उनके शिष्यों से जुड़ी स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए एक विशाल गुरुद्वारे के निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी।
नामकरण और सम्मान: अयोध्या हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि और पंजाब में एयरपोर्ट का नाम संत रविदास जी के नाम पर रखकर देश की सांस्कृतिक विरासत को उचित सम्मान दिया गया है।
गाँव-गाँव तक पहुँचेगी कलश वंदन यात्रा
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने बताया कि संत रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में यह यात्रा मध्य प्रदेश के हर गाँव और कस्बे तक जाएगी।
जन-जागरण अभियान: पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम ने बताया कि गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ यह अभियान माघ पूर्णिमा तक संचालित होगा।
छात्रों से संवाद: अभियान के अंतिम चरण में छात्रावासों में जाकर विद्यार्थियों को संत रविदास जी के जीवन दर्शन, सामाजिक समानता के सिद्धांतों और सांस्कृतिक मूल्यों से अवगत कराया जाएगा।
सनातन और सामाजिक सुधार: वक्ताओं ने रेखांकित किया कि मध्यकाल के कठिन समय में संत रविदास जी ने अपनी वाणी से सनातन परंपरा की रक्षा की और समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं भेदभाव को समाप्त करने का मार्ग दिखाया।
इस राज्य स्तरीय समारोह में अनेक जन-प्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
















