नक्सल ऑपरेशन में ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन : हाईकोर्ट ने डीजीपी को सौंपी जिम्मेदारी, दो महीने में फैसला लेने के आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल पुलिस कर्मियों की पदोन्नति को लेकर चल रहे विवाद पर एक अहम रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं की मांगों पर विचार करें और अगले 60 दिनों के भीतर नियमानुसार उचित निर्णय लें।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद दीपक कुमार नायक व अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के मामले से जुड़ा है। घटनाक्रम के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
सफल ऑपरेशन: अप्रैल 2024 में कांकेर के हापाटोला क्षेत्र में बीएसएफ और पुलिस के संयुक्त अभियान में 29 नक्सली ढेर हुए थे।
पदोन्नति में भेदभाव का आरोप: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस सफल ऑपरेशन में कुल 187 पुलिसकर्मी शामिल थे।
सीमित लाभ: आरोप है कि पुलिस रेगुलेशन के नियम 70(क) के तहत मिलने वाली ‘असामान्य पदोन्नति’ का लाभ केवल 54 जवानों को दिया गया, जबकि बाकी पात्र जवानों को इससे वंचित रखा गया।
कोर्ट का रुख और निर्देश
अदालत ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप कर पदोन्नति देने के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया का सम्मान किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि:
डीजीपी को याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए आवेदनों (Representations) की बारीकी से जांच करनी होगी।
निर्णय पूरी तरह से निष्पक्ष और कानून के दायरे में होना चाहिए।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि याचिकाकर्ता जवान भी समान रूप से पदोन्नति के हकदार हैं, तो उन्हें भी तत्काल इसका लाभ दिया जाए।
















