छत्तीसगढ़ के बिजली संकट को दूर करने सौर व नवीकरणीय ऊर्जा पर अनुसंधान आवश्यक : बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। नई दिल्ली में आयोजित संसद की प्राक्कलन समिति की बैठक के बाद रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बिजली उत्पादन को सशक्त बनाने के लिए सौर और नवीकरणीय ऊर्जा में शोध को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश व छत्तीसगढ़ के पावर प्लांटों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अब पारंपरिक कोयले के स्थान पर ग्रीन एनर्जी विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राज्य में प्रचुर कोयला भंडार होने के बावजूद कोरबा दर्री जैसे थर्मल पावर स्टेशनों को समय-समय पर ईंधन की कमी से जूझना पड़ता है। इसके अलावा, मांग की अनिश्चितता और आपूर्ति में बाधाओं के चलते कई निजी पावर प्लांट बंद होने की स्थिति में हैं। वहीं, एनटीपीसी कोरबा जैसे बड़े संयंत्रों में अचानक तकनीकी खराबी आने से कई बार पूरे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।
छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख आंकड़े:
वर्तमान क्षमता: राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 30,671 मेगावाट हो चुकी है (वर्ष 2000 में यह 1,400 मेगावाट थी)।
वर्तमान ऊर्जा स्रोत: कुल क्षमता में 28,824 मेगावाट थर्मल पावर का योगदान है, जबकि शेष हिस्सा हाइड्रो, सोलर और बायोमास ऊर्जा से मिलता है।
भविष्य का लक्ष्य: अगले 5 से 7 वर्षों में थर्मल, सोलर, हाइड्रो और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से 31,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है।
सांसद अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने और छत्तीसगढ़ को पावर सरप्लस बनाए रखने के लिए हरित ऊर्जा स्रोतों का अधिकतम उपयोग ही सबसे प्रभावी समाधान है।
















