विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप : बस्तर में आर्थिक क्रांति और आधुनिक निवेश पर जोर

रायपुर। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के विकास का एक व्यापक और दूरदर्शी खाका पेश किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर क्षेत्र अब प्रगति, रोजगार और आधुनिक तकनीक के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के सामने विकास के एक अनोखे मॉडल के रूप में स्थापित करना है।
क्षेत्र,प्रमुख लक्ष्य और योजनाएँ
पारिवारिक आय,”बस्तर के परिवारों की मासिक आय को अगले 3 वर्षों में बढ़ाकर ₹30,000 करना।”
सिंचाई विस्तार,”₹2,000 करोड़ से अधिक की लागत से 32,000 हेक्टेयर क्षेत्र में जल आपूर्ति।”
स्वास्थ्य क्रांति,लगभग 36 लाख नागरिकों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार करना।
शिक्षा और तकनीक,अबूझमाड़ और जगरगुंडा में ₹100 करोड़ की लागत से ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: आय बढ़ाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में बस्तर के लगभग 85% परिवारों की मासिक आमदनी ₹15,000 से कम है। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने अगले तीन साल में हर परिवार की कमाई को ₹30,000 प्रति माह तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
डेयरी मॉडल: ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दुधारू मवेशी (गाय और भैंस) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि गांवों में संग्रहण, परिवहन और स्थानीय व्यापार के जरिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
खेती का कायाकल्प: इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इससे किसान धान के अलावा फल, सब्जियां और नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।
सुरक्षा शिविर अब बने ‘सेवा डेरा’
बस्तर के दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा के लिए बनाए गए लगभग 200 कैंपों को अब ‘सेवा डेरा’ में बदल दिया गया है। ये केंद्र अब ग्रामीणों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का मुख्य जरिया बन चुके हैं, जहाँ एक ही छत के नीचे राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग और शिक्षा जैसी 371 सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।
पर्यटन और संस्कृति को वैश्विक पहचान
छत्तीसगढ़ सरकार चित्रकोट जलप्रपात और बौद्ध धरोहर स्थल सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है।
बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी रोमांचक गतिविधियां शुरू की जा रही हैं।
सिरपुर में एक वैश्विक ध्यान केंद्र (ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर) और संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है।
टेकअवे: पर्यटन का यह विस्तार स्थानीय युवाओं, गाइडों, हस्तशिल्प कारीगरों और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए द्वार खोलेगा।
डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक शिक्षा
शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए राज्य में 341 पीएमश्री स्कूल और 5,857 स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए गए हैं। बच्चों को उनकी मातृभाषा में सिखाने के लिए 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी किताबें तैयार की गई हैं। इसके अलावा, ‘एग्रीस्टैक’ योजना के जरिए 33 लाख से अधिक किसानों को सीधे डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है।
निवेश, सुशासन और भविष्य के मिशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 435 प्रशासनिक सुधार किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया गया है। छत्तीसगढ़ अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रहा है, जिसके तहत दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।
राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए सरकार ने 5 विशेष मिशन शुरू किए हैं:
एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मिशन
पर्यटन मिशन
खेल मिशन
अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) मिशन
स्टार्टअप-निपुण मिशन
आर्थिक प्रगति का आंकड़ा: ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 (फरवरी 2026 तक) में राज्य से ₹761.76 करोड़ का निर्यात दर्ज किया गया है, जिसमें यहाँ के सुगंधित चावल की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही है।
















