स्मार्ट मीटर विवाद : आंकड़ों के साथ सरकार का विपक्ष पर बड़ा हमला, कहा– ‘कांग्रेस का दावा आधारहीन, जुलाई में 32% घटी बिजली की खपत’

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच राज्य सरकार ने ताजा आंकड़े जारी कर कांग्रेस के आरोपों पर जोरदार पलटवार किया है। सरकार ने विपक्ष के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल और रीडिंग में बेतहाशा बढ़ोतरी का आरोप लगाया जा रहा था।
आंकड़ों से सरकार का पक्ष:
एक महीने में भारी गिरावट: रायपुर शहर क्षेत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि जून 2026 में कुल बिजली खपत 131.27 मिलियन यूनिट (MU) थी, जो जुलाई 2026 में घटकर 89.38 मिलियन यूनिट पर आ गई। महज एक माह में 31.91% की यह गिरावट दर्शाती है कि मीटरों में कोई तकनीकी खराबी नहीं है।
उच्च खपत वाले उपभोक्ताओं में कमी: 401 से 600 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में लगभग 34% और 600 यूनिट से अधिक खपत करने वालों की संख्या में 64.23% की कमी दर्ज की गई है।
बढ़ी निचले स्लैब के उपभोक्ताओं की संख्या: ‘हाफ बिजली बिल योजना’ (400 यूनिट तक आधा बिल) का फायदा उठाने के लिए लोगों ने बिजली बचत पर ध्यान दिया है। 400 यूनिट से कम खपत करने वाले ग्राहकों की संख्या में 30.34% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं 0-200 यूनिट खपत वाले स्लैब में उपभोक्ताओं की संख्या 50% से भी अधिक बढ़ गई है।
सरकार का बयान: “अगर स्मार्ट मीटर तेज चल रहे होते या गलत रीडिंग दर्ज कर रहे होते, तो आंकड़े बढ़ने चाहिए थे न कि घटने। खपत में आई यह कमी मौसम में आए बदलाव, मानसून और हाफ बिजली बिल योजना के प्रति जनता की जागरूकता का नतीजा है।”
सरकार ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बिना किसी तथ्य के जनता के बीच भ्रम फैला रहा है, जबकि वास्तविक आंकड़े साबित करते हैं कि भाजपा सरकार की नीतियों से आम उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक फायदा और राहत मिल रही है।
















