मध्यप्रदेश

सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर : ‘इंडिया से भारत’ के वैचारिक सफर का विमोचन

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह में “इंडिया से भारत: एक प्रवास” नामक पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र के गौरव को पुनर्जीवित करने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।

सशक्त और स्वाभिमानी भारत का उदय

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने ‘इंडिया’ की औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़कर ‘भारत’ की मूल पहचान को अपनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया:

न्याय और आस्था: अयोध्या में श्री राम मंदिर का शांतिपूर्ण निर्माण भारतीय न्याय प्रणाली की शक्ति और जनमानस की स्वीकार्यता का प्रतीक है।

राष्ट्रीय सम्मान: वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रभक्ति के प्रतीकों को उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिलाना और सीमा पार साहस का प्रदर्शन करना एक नए भारत की पहचान है।

वैश्विक मैत्री: कोरोना संकट के दौरान अन्य देशों की सहायता कर भारत ने विश्व बंधुत्व की मिसाल पेश की है।

मध्य प्रदेश में सांस्कृतिक पुनरुत्थान

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे टीवी-9 भारतवर्ष के निदेशक हेमंत शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना, राम पथ और कृष्ण पाथेय का विकास इसके जीवंत उदाहरण हैं।

लेखक के विचार: एक गौरवशाली गाथा

पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल ने बताया कि 11 अध्यायों में विभाजित यह कृति इस बात को स्पष्ट करती है कि भारत कभी भी कमजोर राष्ट्र नहीं रहा। उन्होंने इतिहास की विसंगतियों और हाल के वर्षों में आए सकारात्मक बदलावों का तुलनात्मक विवरण साझा किया। इस पुस्तक की भूमिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा लिखी गई है।

अध्ययन ग्रंथों का भेंट अर्पण

विमोचन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री को दो महत्वपूर्ण शोध ग्रंथ भी भेंट किए गए:

सूचना का अधिकार और सुशासन: मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में आरटीआई के प्रभाव पर आधारित अध्ययन।

युवा मंथन: युवाओं की सोच और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक शोध ग्रंथ।

इस अवसर पर मंत्रिमंडल के सदस्य, प्रज्ञा प्रवाह के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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