व्यापार समझौतों में अमेरिकी टैरिफ नीति बनी सबसे बड़ा हथियार : जैमीसन ग्रीर

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुचर्चित टैरिफ (आयात शुल्क) नीति का पुरजोर समर्थन किया है। उनका मानना है कि इस सख्त व्यापार नीति के बल पर ही वैश्विक मंच पर अमेरिका का पलड़ा भारी हुआ है। इस रणनीति ने भारत समेत दुनिया के प्रमुख व्यापारिक सहयोगियों के साथ महत्वपूर्ण समझौतों को गति दी है, साथ ही घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर में नई जान फूँकने का काम किया है।
हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में ग्रीर ने आर्थिक विशेषज्ञों, कारोबारी समूहों की आलोचनाओं और कानूनी अड़चनों को खारिज करते हुए इस नीति को बेहद असरदार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया:
“यह रणनीति पूरी तरह सफल रही है। जब भी कोई सरकार पुरानी नीतियों और बड़े उद्योगपतियों के निहित स्वार्थों को चुनौती देकर व्यवस्था बदलने का प्रयास करती है, तो विरोध होना स्वाभाविक है। कई ताकतें पुरानी व्यवस्था को बनाए रखना चाहती थीं, लेकिन हमारी प्राथमिकता इसे बदलने की थी।”
ग्रीर के अनुसार, लगातार बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे (Trade Deficit) पर लगाम लगाने के लिए ट्रंप प्रशासन को यह सख्त रुख अपनाना पड़ा। इस आक्रामक टैरिफ नीति की बदौलत ही अमेरिका, भारत, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (EU), इंडोनेशिया और जापान जैसे देशों को नए सिरे से व्यापारिक वार्ता की मेज पर लाने में कामयाब रहा।
हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से इस नीति के कुछ हिस्सों को कानूनी झटका लगा था, लेकिन ग्रीर ने साफ किया कि प्रशासन को अपनी इस रणनीति पर कोई पछतावा नहीं है।
















