वेदांता पावर प्लांट हादसा : सांसद कमलेश जांगड़े ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग, तीन केंद्रीय मंत्रियों को लिखा पत्र

सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस हृदयविदारक घटना में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। जांजगीर-चांपा की सांसद कमलेश जांगड़े ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्र के तीन प्रमुख मंत्रियों को औपचारिक पत्र भेजा है।
प्रशासनिक जांच के आदेश: 30 दिनों में मांगी रिपोर्ट
हादसे की भयावहता को देखते हुए राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर जांच के निर्देश दे दिए हैं। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी बिलासपुर संभाग के आयुक्त को सौंपी गई है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:
दुर्घटना के सटीक समय और घटनाक्रम का विवरण।
विस्फोट के पीछे की मुख्य वजहें और परिस्थितियां।
भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय।
जांच अधिकारी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर शासन को प्रस्तुत करनी होगी।
हताहतों की स्थिति: घायलों का उपचार जारी
प्लांट में हुए इस धमाके ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। उपचार के दौरान मध्य प्रदेश निवासी मजदूर किस्मत अली की मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़ गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कुल 36 श्रमिक झुलसे थे, जिनमें से 15 का उपचार अभी भी विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
मैनेजमेंट पर गाज: चेयरमैन सहित 10 पर FIR
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। डभरा थाने में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्रबंधन से जुड़े 10 अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग के शुरुआती निरीक्षण में प्लांट के संचालन में गंभीर खामियां पाई गई हैं।
कानूनी धाराएं: पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत अपराध क्रमांक 119/2026 दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
लापरवाही बनी जानलेवा: सुरक्षा मानकों की अनदेखी
शुरुआती जांच रिपोर्ट इशारा करती है कि कंपनी ने उत्पादन के लक्ष्य को समय से पहले पूरा करने के दबाव में सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया था। बॉयलर में तकनीकी खराबी के संकेत मिलने के बावजूद काम को नहीं रोका गया। मशीनों के रख-रखाव में बरती गई यही कोताही अंततः एक बड़े विस्फोट का कारण बनी। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
















