वेदांता पावर प्लांट त्रासदी : सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासन की चुप्पी पर कांग्रेस ने साधा निशाना

रायपुर। सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हाल ही में हुए भीषण हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा की पोल खोल दी है। इस घटना पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ) के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक़ ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे सीधे तौर पर प्रबंधन की चूक और सरकारी तंत्र की नाकामी बताया है।
“मजदूरों की जान से खिलवाड़ कर रहा प्रबंधन”
मोहम्मद सिद्दीक़ ने अपने बयान में कहा कि यह घटना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर काम कराने का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन केवल अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में श्रमिकों की जान जोखिम में डाल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बार-बार हो रही इन दुर्घटनाओं के बावजूद श्रम विभाग और सरकार कठोर कदम क्यों नहीं उठा रहे?
कांग्रेस की प्रमुख माँगें और चेतावनी
मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए प्रकोष्ठ ने सरकार और प्लांट प्रबंधन के समक्ष निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
उचित मुआवजा: प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिवार को 50 लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता दी जाए।
घायलों के लिए सहायता: गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को 20 लाख रुपये की मदद मिले और उनके बेहतर इलाज का पूरा खर्च प्रबंधन वहन करे।
दोषियों पर कार्रवाई: इस हादसे की उच्च स्तरीय न्यायिक जाँच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज हो।
अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट: पूरे संयंत्र का तत्काल निरीक्षण किया जाए और बिना उचित प्रशिक्षण व पंजीकरण के किसी भी मजदूर से कार्य न कराया जाए।
सात दिनों का अल्टीमेटम
मोहम्मद सिद्दीक़ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और प्रबंधन ने 7 दिनों के भीतर इन माँगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों और उनके जीवन की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
















