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अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष : तालिबान का रावलपिंडी और क्वेटा के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले का दावा

काबुल/इस्लामाबाद (एजेंसी)। दक्षिण एशिया में सीमाई तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि उनकी वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों पर जवाबी हवाई हमले किए हैं।

इन ठिकानों को बनाया गया निशाना

तालिबान के अनुसार, यह ऑपरेशन पाकिस्तान द्वारा अफगान सीमा के उल्लंघन के विरोध में किया गया था। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में निम्नलिखित स्थानों पर हमले का दावा किया है:

रावलपिंडी: नूर खान एयरबेस।

क्वेटा: पाकिस्तानी सेना की 12वीं कोर का मुख्यालय।

खैबर पख्तूनख्वा: मोहम्मद एजेंसी और घलानी स्थित सैन्य ठिकाने।

तालिबान का कहना है कि उनके हमले ‘सटीक और प्रभावी’ थे, जिससे पाकिस्तानी सैन्य ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा है।

संघर्ष की वजह: काबुल और बगराम पर हमला

तालिबान ने स्पष्ट किया कि यह सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रक्षात्मक थी। उनके मुताबिक, बीती रात पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बगराम एयरबेस पर बमबारी की थी। इसी आक्रामकता का उत्तर देने के लिए तालिबान ने सीमा पार हवाई हमले का सहारा लिया।

“अगर पाकिस्तान हमारे हवाई क्षेत्र का उल्लंघन जारी रखता है, तो भविष्य में परिणाम और भी गंभीर होंगे।” – अफगान रक्षा मंत्रालय

युद्ध जैसी स्थिति: चौथे दिन भी तनाव जारी

अल-जजीरा की रिपोर्टों के अनुसार, काबुल में भारी विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं। तालिबान के दावों के मुताबिक, रविवार सुबह जब पाकिस्तानी जेट विमानों ने अफगान सीमा लांघने की कोशिश की, तो उनके एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने कड़ा मुकाबला किया।

विशेष रूप से, बगराम एयरबेस (जो कभी अमेरिकी सेना का मुख्य केंद्र था) को निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिसे तालिबान ने नाकाम करने का दावा किया है।

वर्तमान स्थिति:

फिलहाल पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इन हवाई हमलों के दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं आया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच बढ़ता यह सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।

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