पीएम सूर्य घर योजना : काशीराम ने बिजली के बिल से पाई मुक्ति, अब खुद बने ‘ऊर्जादाता’

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। आधुनिक तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन के संगम से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ जिले के निवासियों के लिए न केवल आर्थिक राहत लेकर आई है, बल्कि उन्हें बिजली के उपभोक्ता से उत्पादक (ऊर्जादाता) की श्रेणी में भी खड़ा कर दिया है।
शून्य हुआ बिजली बिल, बढ़ी आर्थिक बचत
ग्राम टेकापार कला के रहने वाले श्री काशीराम श्रीवास इस बदलाव का एक जीवंत उदाहरण हैं। काशीराम ने अपनी छत पर 3 किलोवाट का सोलर पावर सिस्टम लगवाया है। इससे पहले उन्हें हर महीने 1,000 से 1,500 रुपये तक बिजली का बिल चुकाना पड़ता था, लेकिन सोलर प्लांट लगने के बाद जनवरी माह में उनका बिल शून्य रहा।
काशीराम के अनुभव की कुछ मुख्य बातें:
बिजली निर्यात: उन्होंने न केवल अपनी जरूरतें पूरी कीं, बल्कि जनवरी में 240 यूनिट अतिरिक्त बिजली ग्रिड को वापस भी दी।
आसान स्थापना: केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली भारी सब्सिडी ने इसे वहन करने योग्य बना दिया है।
भारी सब्सिडी का लाभ
वर्तमान में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा आकर्षक वित्तीय सहायता दी जा रही है। 3 किलोवाट या उससे अधिक के प्लांट पर मिलने वाला अनुदान इस प्रकार है:
विवरण, सब्सिडी राशि
केंद्र सरकार का अनुदान,”78,000 रुपये”
राज्य सरकार का अनुदान,”30,000 रुपये”
कुल आर्थिक सहायता,”1,08,000 रुपये”
पर्यावरण संरक्षण की ओर एक कदम
काशीराम श्रीवास का मानना है कि यह योजना सिर्फ पैसा बचाने का जरिया नहीं है, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का एक माध्यम भी है। सौर ऊर्जा से बिजली बनाने में कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जो प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने में सहायक है।
अपनी सफलता से उत्साहित होकर, वे अब गाँव के अन्य लोगों को भी इस स्वच्छ ऊर्जा विकल्प को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित और बेहतर कल सुनिश्चित करेगा।
















