छत्तीसगढ़

‘आजीविका डबरी’ से बदली किसानों की किस्मत, जल संरक्षण के साथ बढ़ी आमदनी

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो रही है। विकासखंड लोरमी के ग्राम पंचायत औराबांधा में एक किसान, किशन सिंह, की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। उनके खेत में निर्मित “आजीविका डबरी” ने न केवल सिंचाई की समस्या को हल किया है, बल्कि आय के नए स्रोत भी खोल दिए हैं।

जल संचयन से आत्मनिर्भरता की ओर

किशन सिंह पहले पानी की कमी के कारण खेती में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। प्रशासन के सहयोग से 1.94 लाख रुपये की लागत से उनके खेत में डबरी (छोटा तालाब) का निर्माण किया गया।

इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

सतत सिंचाई: अब उनके पास साल भर खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है।

दोहरी फसल: वर्षा जल संचयन और भू-जल स्तर सुधरने से अब वे खरीफ और रबी, दोनों सीजन में निश्चिंत होकर खेती कर पा रहे हैं।

मछली पालन: डबरी का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है; अब इसमें मत्स्य पालन के जरिए अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा रही है।

स्थानीय रोजगार और पलायन पर लगाम

इस परियोजना ने न केवल व्यक्तिगत लाभ पहुँचाया, बल्कि सामुदायिक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला है। डबरी निर्माण के दौरान कुल 792 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इससे गाँव के मजदूरों को स्थानीय स्तर पर ही काम मिला, जिससे रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन में प्रभावी कमी आई है।

जिले में योजना की प्रगति

मुंगेली जिला प्रशासन इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले के आँकड़े इसकी सफलता को दर्शाते हैं:

विवरण,संख्या / स्थिति

कुल स्वीकृत डबरी कार्य,285
कार्य जो शुरू हो चुके हैं,218
पूर्ण हो चुके कार्य,20
लक्ष्य तिथि,मार्च 2026 तक पूर्ण

‘आजीविका डबरी’ जैसी पहल यह दर्शाती है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का सही प्रबंधन किया जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है। यह जल संरक्षण, पशुपालन और कृषि का एक ऐसा एकीकृत मॉडल है जो किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है।

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