विकास और पर्यावरण का संगम : डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पेंच टाइगर रिजर्व का कायाकल्प

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य सरकार के उस संकल्प को दोहराया है जहाँ वन्यजीव संरक्षण और मानवीय प्रगति एक साथ चलते हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रकृति और आधुनिकता के बीच का संतुलन ही प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। इसी दिशा में पेंच टाइगर रिजर्व से स्वेच्छा से विस्थापित हुए परिवारों का पुनर्वास अब एक राष्ट्रीय मिसाल बन चुका है।
कर्माझिरी: जनजातीय उत्थान का एक नया अध्याय
मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप, जनजातीय परिवारों को न केवल नई जगह पर बसाया जा रहा है, बल्कि उन्हें एक सम्मानित जीवन देने के लिए हर संभव संसाधन जुटाए जा रहे हैं। कर्माझिरी में तैयार हो रहे 40 नए आवास इस बात का प्रमाण हैं कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए अपना स्थान छोड़ने वाले परिवारों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन परिवारों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव और उनकी मुस्कान इस परियोजना की सार्थकता को दर्शाती है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हुए विस्थापितों के आशियाने
सरकार का प्रयास केवल घर देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सुविधायुक्त परिवेश प्रदान करना है। कर्माझिरी में दी जा रही सुविधाओं की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
सौर ऊर्जा से जगमगाते घर: कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत यूनिटी बैंक के सहयोग से इन घरों में सोलर लाइटिंग की व्यवस्था की गई है।
आधारभूत ढाँचा: बेहतर आवागमन के लिए पक्की सड़कें, स्वच्छ पेयजल और निरंतर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: विस्थापित परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नजदीकी स्वास्थ्य सेवाओं का विशेष प्रबंध किया गया है।
आजीविका के अवसर: पुनर्वासित क्षेत्रों में परिवारों को खेती के लिए उपजाऊ भूमि और रोजगार के नए विकल्प दिए जा रहे हैं।
संरक्षण और कल्याण का ‘पेंच मॉडल’
वन विभाग द्वारा क्रियान्वित यह स्वैच्छिक पुनर्वास कार्यक्रम आज एक सफल मॉडल के रूप में उभरा है। यह दर्शाता है कि यदि योजना संवेदनशील और सुनियोजित हो, तो वन संरक्षण के साथ-साथ वंचित समुदायों के जीवन स्तर में भी क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है। यह पहल न केवल जंगलों को सुरक्षित करती है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में नई आशाओं का संचार भी कर रही है।
















