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विजय के शपथ ग्रहण में राज्य गीत के क्रम पर रार, गरमाई सियासत

चेन्नई (एजेंसी)। तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) प्रमुख जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। विवाद का कारण बना राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ को गाने का क्रम। समारोह के दौरान इसे राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया, जिसे लेकर राज्य की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता की बहस तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

रविवार को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने जोसेफ विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। कार्यक्रम की रूपरेखा में एक बदलाव देखा गया:

पुरानी परंपरा: तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ से होती है और समापन राष्ट्रगान से।

समारोह का क्रम: सबसे पहले ‘वंदे मातरम’ गाया गया, उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’, और अंत में राज्य गीत को जगह मिली।

यही बदलाव विपक्षी दलों और सरकार के सहयोगियों को रास नहीं आया।

सहयोगियों और विपक्ष ने उठाए सवाल

तमिलनाडु की राजनीति में तमिल भाषा और संस्कृति एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। ऐसे में इस घटना को तमिल पहचान की उपेक्षा के तौर पर देखा जा रहा है:

वामपंथी दल (CPI/CPM): सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि राज्य गीत का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है।

वीसीके (VCK): थोल थिरुमावलवन ने इसे तमिल संस्कृति के प्रतीकों के साथ अनुचित व्यवहार बताया।

पीएमके (PMK): एस. रामदास ने मांग की कि भविष्य में राज्य गीत की प्राथमिकता और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।

यही स्थिति प्रोटेम स्पीकर एम.वी. करुपैया के शपथ ग्रहण में भी दोहराई गई, जिससे विवाद और गहरा गया।

सरकार की सफाई: ‘केंद्र के सर्कुलर’ का हवाला

विवाद बढ़ता देख टीवीके सरकार के मंत्री आधव अर्जुन ने स्थिति स्पष्ट की। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

राजभवन का निर्देश: सरकार का कहना है कि यह बदलाव उनकी इच्छा से नहीं, बल्कि राज्यपाल के माध्यम से आए केंद्र सरकार के एक नए सर्कुलर के कारण हुआ।

पुरानी परंपरा की बहाली: मंत्री ने स्पष्ट किया कि टीवीके सरकार इस नई व्यवस्था से सहमत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य के कार्यक्रमों में पुरानी परंपरा (शुरुआत राज्य गीत से और अंत राष्ट्रगान से) को ही लागू किया जाएगा।

सांस्कृतिक गौरव: उन्होंने दोहराया कि ‘तमिल थाई वजथु’ राज्य की 100 साल पुरानी विरासत है और इसका सम्मान सर्वोपरि रहेगा।

फिलहाल, इस सफाई के बावजूद राज्य में भाषाई गौरव और संवैधानिक प्रोटोकॉल के बीच की यह जंग शांत होती नहीं दिख रही है।

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