वनांचल से स्वीमिंग पूल तक : बैगा बच्चों के हुनर को मिल रहे हैं नए पंख

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के सुदूर जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले जनजातीय बच्चों की प्रतिभा अब सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में एक अनूठा जिला स्तरीय समर कैंप (ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर) आयोजित किया गया है। यह शिविर विशेष रूप से पिछड़ी बैगा जनजाति के बच्चों के जीवन में बदलाव की एक नई सुबह लेकर आया है। जो बच्चे कल तक केवल नदी-नालों में नहाया करते थे, वे आज आधुनिक स्वीमिंग पूल (तरणताल) में तैराकी की प्रोफेशनल बारीकियां सीख रहे हैं।
पेण्ड्रा नगर पालिका परिषद के तरणताल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा इस खास कैंप का संचालन किया जा रहा है। इसमें गौरेला विकासखंड के सुदूर वनांचलों से आने वाले बैगा युवक-युवतियों को प्राथमिकता दी गई है। प्रशासन की टीम ने खुद ग्रामीण इलाकों में जाकर इन परिवारों से संपर्क किया और उन्हें अपने बच्चों को इस खेल विधा से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
नई सीख से बढ़ा हौसला
प्राकृतिक माहौल और जंगलों के बीच पले-बढ़े इन बच्चों के लिए आधुनिक तरणताल का अनुभव बेहद रोमांचक और नया है। यहाँ वे सिर्फ तैरना ही नहीं सीख रहे, बल्कि खेल भावना, अनुशासन और आपसी तालमेल का महत्व भी समझ रहे हैं। शिविर में शामिल बच्चों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे इतने बड़े पूल में उतरेंगे। तैराकी की नई तकनीकों को जानकर उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और वे अब खेल की दुनिया में अपना करियर बनाने का सपना देखने लगे हैं।
नेशनल लेवल के कोच दे रहे हैं ट्रेनिंग
इस समर कैंप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बच्चों को तराशने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी प्रशिक्षकों को सौंपी गई है। कोच बच्चों को तैराकी की प्रमुख विधाएं जैसे:
फ्री-स्टाइल (Free-style)
बैक-स्ट्रोक (Back-stroke)
बटरफ्लाई-स्ट्रोक (Butterfly-stroke)
ब्रेस्ट-स्ट्रोक (Breast-stroke)
मेडले (Medley)
इन सभी विधाओं का सुबह और शाम दोनों पालियों में कड़ा अभ्यास कराया जा रहा है। प्रशिक्षकों के मुताबिक, बैगा बच्चों में जन्मजात शारीरिक मजबूती, गजब का साहस और सीखने की ललक होती है। सही ट्रेनिंग मिलने पर ये बच्चे भविष्य में बेहतरीन एथलीट साबित हो सकते हैं।
आदिवासी सशक्तिकरण की एक अनोखी मिसाल
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने के कारण बैगा समुदाय के बच्चों की शारीरिक क्षमता और सहनशीलता आम बच्चों से कहीं बेहतर होती है। अगर इन्हें सही संसाधन और सही मंच मिले, तो ये राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल खेल प्रतिभाओं को निखार रही है, बल्कि इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर आदिवासी सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण पेश कर रही है।
युवाओं के विकास पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के बेहतर अवसर देने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार की नीति यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी होनहार बच्चा सुविधाओं की कमी के चलते पीछे न रह जाए। बैगा बच्चों को खेलों से जोड़ना इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिससे इन बच्चों में बड़े लक्ष्य हासिल करने का जज्बा पैदा हो रहा है।
उम्मीदों की नई उड़ान
कल तक जो बच्चे पहाड़ों और जंगलों की पगडंडियों तक सिमटे हुए थे, वे आज तरणताल के पानी में पूरे जोश के साथ लहरों को चुनौती दे रहे हैं। यह बदलाव प्रशासन की संवेदनशीलता और बच्चों की लगन का नतीजा है। यह समर कैंप इन बच्चों के जीवन को एक सकारात्मक मोड़ दे रहा है। आने वाले समय में यही बच्चे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाएंगे, यही इस पूरे अभियान का असल मकसद है।
















