नई सोच, नई उम्मीद : सुशासन अभियान से ग्रामीणों को मिल रहा मुफ्त इलाज का सुरक्षा कवच

गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘सुशासन तिहार’ ग्रामीण इलाकों के निवासियों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। सरकारी योजनाओं को सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचाने के इस विशेष अभियान ने आम लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। इसी कड़ी में, गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले के आमाडोब गांव की रहने वाली झिलमित मरावी को आयुष्मान कार्ड सौंपा गया है, जिससे उनके पूरे परिवार की सेहत की चिंता दूर हो गई है।
अब इलाज के खर्च से नहीं थमेगी जिंदगी: ₹5 लाख तक का मुफ्त उपचार
ग्रामीण अंचलों में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जो अचानक आई किसी गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते। झिलमित मरावी का परिवार भी सीमित संसाधनों के कारण हमेशा स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को लेकर डरा रहता था। लेकिन अब आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद उन्हें निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:
सालाना मदद: देश के किसी भी चयनित अस्पताल में हर साल 5 लाख रुपये तक का बिल्कुल मुफ्त इलाज।
आर्थिक राहत: बीमारी के वक्त कर्ज लेने या जमीन गिरवी रखने की मजबूरी से पूरी तरह मुक्ति।
मानसिक शांति: भविष्य में आने वाली किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच।
दफ्तरों के चक्कर काटने से मिली मुक्ति, गांव खुद पहुंच रहा है प्रशासन
बदलाव की नई तस्वीर: इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अब ग्रामीणों को अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। बल्कि प्रशासन खुद चलकर गांवों तक पहुंच रहा है।
अधिकारी मौके पर ही पात्र लोगों की पहचान कर रहे हैं और तुरंत उन्हें योजनाओं का लाभ दे रहे हैं। इस जनहितैषी कदम से न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता आई है, बल्कि सरकार और जनता के बीच का भरोसा भी काफी मजबूत हुआ है।
आयुष्मान योजना: गरीब परिवारों का असली सहारा
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल यह सुनिश्चित करती है कि पैसों की तंगी की वजह से किसी भी गरीब का इलाज न रुके। ‘सुशासन तिहार’ के जरिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक इस स्वास्थ्य सुरक्षा को पहुंचाना यह साबित करता है कि वर्तमान राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता के कल्याण के लिए समर्पित है।
















