छत्तीसगढ़

खौफ के साये से पक्के आशियाने तक : करमचन्द्र के परिवार के लिए वरदान बनी ‘पीएम आवास योजना’

सूरजपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला सिंघरा गाँव घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। इस गाँव के निवासी करमचन्द्र और उनका परिवार लंबे समय तक एक ऐसे डर में जीने को मजबूर था, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। दरअसल, यह इलाका हाथियों का मुख्य गलियारा (एलीफेंट कॉरिडोर) माना जाता है। यहाँ हर साल हाथियों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे स्थानीय लोगों की जान-माल पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। ऐसे संवेदनशील इलाके में करमचन्द्र का परिवार मिट्टी और खपरैल से बने एक बेहद कमजोर, कच्चे मकान में रहता था, जहाँ हर रात दहशत में कटती थी।

दोहरी चुनौतियों से जूझता परिवार

इस परिवार के सामने मुसीबतें कम नहीं थीं। एक तरफ जहाँ मानसून के आते ही मकान की छत से पानी टपकने लगता था और दीवारें ढहने का डर रहता था, वहीं दूसरी तरफ हाथियों के गाँव में घुसने की खबर मिलते ही सबकी रातों की नींद उड़ जाती थी। करमचन्द्र पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि कई रातें तो उन्होंने सिर्फ अपने बच्चों की सुरक्षा की फिक्र में जागकर गुजारीं। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने परिवार को एक महफूज जिंदगी देना था।

उम्मीद की नई किरण

इसी संकट के बीच, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इस परिवार के लिए एक तारणहार बनकर आई। जब सरकारी सर्वे के बाद पात्रता सूची में करमचन्द्र का नाम आया, तो उनके सपनों को पंख मिल गए। स्थानीय ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए तुरंत पक्के मकान का काम शुरू करवाया। हालांकि, जंगली इलाका होने और हाथियों की आवाजाही के कारण निर्माण कार्य में कई भौगोलिक बाधाएं आईं, लेकिन प्रशासन की प्रतिबद्धता के चलते काम को प्राथमिकता से पूरा किया गया।

सामूहिक प्रयासों से खड़ा हुआ मजबूत घर

इस आशियाने को बनाने में सरकारी आर्थिक मदद के साथ-साथ मनरेगा (MGNREGA) के तहत मिलने वाली मजदूरी ने भी करमचन्द्र को बड़ा संबल दिया। प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और गाँव के लोगों के आपसी तालमेल से निर्माण सामग्री समय पर मौके पर पहुँची। नतीजा यह हुआ कि तय समय के भीतर एक मजबूत आरसीसी (RCC) छत वाला सुरक्षित मकान बनकर तैयार हो गया।

“पहले हर मौसम एक आफत की तरह आता था और रातें खौफ में कटती थीं। लेकिन आज हमारे पास अपनी एक मजबूत छत है, जहाँ मेरे बच्चे सुरक्षित हैं। यह सिर्फ ईंट-पत्थर का मकान नहीं है, बल्कि हमारे खोए हुए आत्मविश्वास और सुरक्षित भविष्य की नई शुरुआत है।”
— करमचन्द्र (भावुक होते हुए)

सुरक्षा के साथ मिला सम्मान

आज करमचन्द्र का पूरा परिवार इस नए पक्के मकान में बेहद सम्मान और सुकून की जिंदगी बसर कर रहा है। इसके अलावा, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने शौचालय ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को और आसान बना दिया है। अब परिवार की महिलाओं और बच्चों को बुनियादी जरूरतों के लिए जंगल का रुख नहीं करना पड़ता, जिससे जंगली जानवरों के हमले का खतरा भी लगभग खत्म हो गया है।

सुशासन का एक जीवंत उदाहरण

करमचन्द्र के जीवन में आया यह बदलाव सिर्फ एक मकान मिलने की कहानी नहीं है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि जब सरकार की नीतियां ज़मीनी स्तर पर पूरी ईमानदारी से लागू होती हैं, तो वे समाज के आखिरी व्यक्ति तक सुरक्षा और सम्मान पहुँचाती हैं। हाथी प्रभावित इस सुदूर जंगली क्षेत्र में बना यह पक्का मकान आज संवेदनशीलता, विकास और सुशासन की एक बेहतरीन नजीर पेश कर रहा है।

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