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यूएस वीजा प्रोसेसिंग में सुस्ती : ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की किल्लत बढ़ने की आशंका

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका में जे-1 वीजा छूट (Visa Waiver) की कछुआ चाल ने वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने आगाह किया है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर हो रही इस देरी को जल्द ठीक नहीं किया गया, तो विदेशों से पढ़कर आए सैकड़ों डॉक्टरों को अमेरिका से वापस जाना पड़ सकता है। इसका सबसे बुरा असर उन ग्रामीण इलाकों पर पड़ेगा जो पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं।

स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री को भेजे एक पत्र में न्यूयॉर्क की डेमोक्रेट सीनेटर गिलिब्रैंड ने इस बात को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि ऑफिस ऑफ ग्लोबल अफेयर्स में फाइलों के अटके होने के कारण योग्य विदेशी डॉक्टर अस्पतालों में अपनी सेवाएं शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इस प्रशासनिक रुकावट के चलते न्यूयॉर्क के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के अस्पताल संकट में हैं।

भारतीय डॉक्टरों पर भी पड़ेगा असर

यह पूरा मामला भारत के लिहाज से भी काफी संवेदनशील है। दरअसल, अमेरिका में सेवाएं दे रहे विदेशी मूल के डॉक्टरों में सबसे बड़ी तादाद भारतीय डॉक्टरों की है। ऐसे में वीजा प्रक्रिया में रुकावट आने से बड़ी संख्या में भारतीय चिकित्सा पेशेवर प्रभावित हो सकते हैं।

गिलिब्रैंड के अनुसार, न्यूयॉर्क जैसे राज्यों की स्वास्थ्य व्यवस्था काफी हद तक विदेशी डॉक्टरों के भरोसे चलती है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि:

न्यूयॉर्क के कुल डॉक्टरों में से एक-तिहाई से ज्यादा विदेशी शैक्षणिक संस्थानों से पढ़कर आए हैं।

राज्य के 16 ग्रामीण जिलों (काउंटियों) में डॉक्टरों का भारी अकाल है।

हालात इतने खराब हैं कि कई जिलों में बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) और महिला रोग विशेषज्ञ उपलब्ध ही नहीं हैं।

इन इलाकों में प्रति 10,000 आबादी पर सिर्फ 4 प्राइमरी केयर डॉक्टर हैं, जो राज्य के सामान्य औसत से आधे से भी कम है।

क्या है जे-1 वीजा वेवर कार्यक्रम?

ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल आमतौर पर विदेशी डॉक्टरों को रोकने के लिए ‘जे-1 वीजा वेवर’ प्रोग्राम का सहारा लेते हैं। इस नियम के तहत विदेशी डॉक्टरों को अमेरिका में रुकने की इजाजत तब मिलती है, जब वे डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे पिछड़े या ग्रामीण इलाकों में काम करने के लिए तैयार होते हैं।

सीनेटर ने बताया कि उनके दफ्तर को कई अस्पतालों और डॉक्टरों से शिकायतें मिली हैं। डॉक्टरों को नौकरी के ऑफर तो मिल चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई के कारण वे महीनों से अधर में लटके हैं। अस्पताल भी अगले साल के लिए स्टाफ की प्लानिंग नहीं कर पा रहे हैं।

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