छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 : कुंती जगने के संघर्ष को मिला सम्मान, कच्चे आशियाने से पक्के घर तक का सफर

दुर्ग। एक सुरक्षित छत और खुद का पक्का मकान किसी भी परिवार के लिए सिर्फ बुनियादी जरूरत नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और सुरक्षित कल की बुनियाद होता है। दुर्ग नगर निगम के उरला वार्ड की रहने वाली श्रीमती कुंती जगने भी सालों से इसी उम्मीद में जी रही थीं। आखिरकार ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0’ की बदौलत उनका यह पुराना सपना सच हो गया है।

आर्थिक तंगी और किराए के मकान का संघर्ष

कुंती जगने पेशे से मजदूर हैं और उनके पति श्री प्रभुदास जगने मोची का काम करके परिवार का गुजारा चलाते हैं। सीमित और बेहद कम आमदनी के कारण पूरे परिवार का पेट पालना ही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। ऐसे में खुद का घर बनाने की बात सोचना भी उनके लिए मुमकिन नहीं था। वे लंबे समय तक किराए के मकान में रहे, जहाँ उन्हें हर बदलते मौसम के साथ भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मुश्किलों के दिन:

बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण पूरा परिवार रात-रात भर जागकर बच्चों की सुरक्षा की चिंता करता था। वहीं, गर्मियों के मौसम में कमरा भट्टी की तरह तपता था, जिससे चैन की नींद लेना भी दूभर हो जाता था। इन तमाम परेशानियों के बीच परिवार बस एक अदद सुरक्षित आशियाने की आस लगाए बैठा था।

योजना से मिली सपनों को नई उड़ान

कुंती के इस लंबे इंतजार को तब विराम मिला, जब ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0’ के तहत उनके नाम को मंजूरी मिली। दुर्ग नगर निगम के प्रशासनिक सहयोग और योजना से प्राप्त वित्तीय सहायता की मदद से उनके नए मकान का निर्माण कार्य शुरू हुआ। देखते ही देखते उनकी बरसों की उम्मीद एक मजबूत पक्के मकान की शक्ल में तब्दील हो गई।

आज कुंती अपने पूरे परिवार के साथ अपने खुद के घर में बेहद खुश और सुकून से रह रही हैं। किराए के मकान के डर और भविष्य की चिंताओं की जगह अब उनके जीवन में सुरक्षा, संतोष और आत्मविश्वास ने ले ली है।

“यह सिर्फ मकान नहीं, हमारे संघर्षों की जीत है”

अपनी खुशी साझा करते हुए कुंती कहती हैं:

“यह नया घर सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह हमारे सालों के संघर्ष और मेहनत का फल है।”

“इस योजना ने हमारे सिर को न केवल एक मजबूत छत दी है, बल्कि समाज में हमें एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन भी दिया है।”

कुंती जगने की यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे सरकारी कल्याणकारी नीतियां और स्थानीय प्रशासन का सही तालमेल जमीनी स्तर पर जरूरतमंदों के जीवन में बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इस योजना ने कुंती जैसे अनगिनत परिवारों के सपनों को सच कर उन्हें एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य सौंपने का काम किया है।

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