छत्तीसगढ़

नवापारा के ‘सुशासन शिविर’ में बड़ी कार्रवाई : सांसद बृजमोहन अग्रवाल के कड़े तेवर, लापरवाह रेंजर पर गिरी निलंबन की गाज

रायपुर। रायपुर जिले के गोबरा नवापारा में आयोजित ‘सुशासन तिहार शिविर’ में उस समय हड़कंप मच गया, जब जनता की समस्याएं सुनने के लिए बुलाए गए एक जिम्मेदार अधिकारी ही मौके से नदारद मिले। इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंच से ही संबंधित रेंजर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के आदेश दे दिए। रेंजर की इस अनुपस्थिति पर सांसद के गुस्से और सख्त निर्देश का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है।

क्यों भड़के सांसद? जानिए पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा विवाद कुलेश्वर महादेव शासकीय कॉलेज की बाउंड्री वॉल (सीमा सुरक्षा दीवार) के निर्माण से जुड़ा हुआ है। इस निर्माण कार्य को लेकर वन विभाग की ओर से आपत्ति जताई गई थी। जब शिविर में इस समस्या पर चर्चा शुरू हुई, तो संबंधित क्षेत्र के रेंजर वहां मौजूद नहीं थे।

अधिकारियों की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर नाराजगी जाहिर करते हुए सांसद अग्रवाल ने कहा कि जब सरकार ने आम जनता की शिकायतों का मौके पर निपटारा करने के लिए सभी विभागों को पाबंद किया है, तो ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन से गायब रहना सीधे तौर पर कर्तव्य के प्रति लापरवाही है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि रेंजर को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज नोटिस) थमाया जाए और तुरंत निलंबित किया जाए।

जमीन विवादों पर भी खिंचाई, पटवारी और तहसीलदार मंच पर तलब

शिविर के दौरान केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि राजस्व से जुड़े मामलों में भी अधिकारियों को फटकार झेलनी पड़ी। हरिहर हाई स्कूल की जमीन पर अवैध कब्जे (अतिक्रमण) और नवापारा हायर सेकेंडरी स्कूल की रिजर्व भूमि से जुड़े विवाद सामने आने पर सांसद ने पटवारी, आरआई (राजस्व निरीक्षक) और तहसीलदार को सीधे मंच पर बुला लिया। उन्होंने जमीन से जुड़े इन तमाम पुराने और लंबित मामलों की बारीकी से जांच कर जल्द से जल्द समाधान करने की हिदायत दी।

कड़ा अल्टीमेटम: 7 दिनों में हल करें जनता की समस्याएं

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सुशासन शिविर में आए अलग-अलग विभागों के आवेदनों पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन को स्पष्ट समय-सीमा दी है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा:

“शिविर में जनता की ओर से जितने भी आवेदन और शिकायतें मिली हैं, उनका निराकरण हर हाल में अगले 7 दिनों के भीतर हो जाना चाहिए। अगर तय समय के भीतर काम पूरा नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ इससे भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

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