छत्तीसगढ़

साय सरकार की ‘सुशासन’ पहल : अब खेती के लिए नहीं भटकेगा किसान, निर्मल राम की बदली किस्मत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई में चलाया जा रहा ‘सुशासन तिहार’ ग्रामीण इलाकों के अन्नदाताओं के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरा है। इस अभियान के तहत गांवों में लगाए जा रहे विशेष समाधान शिविरों का सीधा असर अब जमीन पर दिखने लगा है, जहाँ किसानों की शिकायतों को न सिर्फ सुना जा रहा है बल्कि मौके पर ही उनका निपटारा कर सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।

इसका एक बेहतरीन उदाहरण सरगुजा जिले के लटोरी गांव के रहने वाले किसान निर्मल राम हैं। हाल ही में लगे एक शिविर में निर्मल राम का ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) बनकर तैयार हुआ, जिसने उनकी खेती की राह को बेहद आसान बना दिया है। अब उन्हें खाद, बीज और फसलों के लिए जरूरी पैसों के संकट से मुक्ति मिल गई है।

पहले की मुश्किलें और अब की राहत

अपनी पुरानी आपबीती साझा करते हुए निर्मल राम ने बताया कि पहले केसीसी न होने की वजह से उन्हें फसलों की बुवाई के समय पैसों के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। जेब में पर्याप्त पूंजी न होने के कारण वे बाजार के निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर खाद-बीज खरीदने को मजबूर थे, जिससे उनकी खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी और मुनाफा कम हो रहा था।

लेकिन सुशासन तिहार के कैंप में जैसे ही उन्होंने आवेदन किया, प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत उनका क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया। इस कार्ड की मदद से अब वे सहकारी समिति से बेहद कम ब्याज पर कृषि लोन ले सकेंगे। साथ ही सरकारी दरों पर सही कीमत में खाद-बीज भी हासिल कर पाएंगे, जिससे उनकी लागत घटेगी और पैदावार बेहतर होगी।

गाँव में ही हो रहा समस्याओं का अंत

निर्मल राम ने इस कल्याणकारी कदम के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार का यह अभियान उनके जैसे छोटे किसानों के लिए वरदान है, क्योंकि अब काम के लिए शहर के चक्कर नहीं काटने पड़ते; अधिकारी खुद गाँव आकर काम कर रहे हैं। इस कार्ड के मिलने से उनकी मानसिक और आर्थिक चिंताएं काफी हद तक दूर हो गई हैं।

गौरतलब है कि इस पूरे अभियान के दौरान छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में सिर्फ कृषि ऋण ही नहीं, बल्कि सॉइल हेल्थ कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और पेंशन जैसी तमाम बुनियादी सुविधाओं को तुरंत आम जनता तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

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