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दुर्ग में ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़ : कांग्रेस नेता का बेटा मुख्य सरगना, यूपी-बिहार के 8 ऑपरेटर भी गिरफ्तार

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे अवैध धंधे का खुलासा कांग्रेस के ही दो नेताओं के आपसी झगड़े के बाद हुआ। छत्तीसगढ़ कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश महासचिव राजेश गुप्ता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनिल सिंह के बीच मारपीट और विवाद इतना बढ़ गया कि अनिल सिंह ने पुलिस अधीक्षक (SP) से राजेश गुप्ता के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

इस शिकायत के बाद पुलिस ने जब छानबीन शुरू की, तो कांग्रेस नेता राजेश गुप्ता के बेटे निशांत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में चल रहे एक अंतरराज्यीय ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट का सच सामने आया।

आपसी रंजिश से खुला सट्टे का काला कारोबार

शिकायत के अनुसार, राजेश गुप्ता और उसका बेटा निशांत कुमार गुप्ता दूसरे राज्यों में छिपकर ऑनलाइन सट्टे का अवैध कारोबार चला रहे थे और इससे करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति बना रहे थे। राजेश गुप्ता का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है और उस पर पहले जाली नोट छापने का मामला दर्ज हो चुका है। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही राजेश गुप्ता फिलहाल फरार हो गया है, जिसकी तलाश की जा रही है।

नागपुर के ठिकाने पर छापा, यूपी-बिहार के आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग एसएसपी को शिकायत मिलने के बाद, पुलिस ने 4 जून को छावनी थाने में मामला दर्ज किया। मुख्य आरोपी निशांत कुमार गुप्ता को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की गई, तो उसने नागपुर (महाराष्ट्र) में किराए के मकान से चल रहे अपने मुख्य ठिकाने का पता बताया। दुर्ग पुलिस ने नागपुर में दबिश देकर वहां से 8 ऑपरेटरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से 6 उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और मऊ के रहने वाले हैं, जबकि 2 आरोपी बिहार के हैं। निशांत इन ऑपरेटरों को 20000 से 25000 रुपये महीना वेतन और अन्य सुविधाएं देकर सट्टे की आईडी मैनेज करवाता था।

‘क्रिकेट बज्ज’ और ‘रुबीबेट’ ऐप से होता था खेल

पूछताछ में यह बात सामने आई कि निशांत कुमार गुप्ता “C-B. Cricket Buzz Betting App” और “RubyBet” जैसे ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म की आईडी लेकर अलग-अलग राज्यों से यह नेटवर्क चला रहा था। इस नेटवर्क के जरिए रोज लगभग 4 से 5 लाख रुपये और महीने का करीब १.५० करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन (डिपॉजिट और विड्रॉल) किया जा रहा था।

लाखों के जेवरात, कैश और दर्जनों सिम कार्ड बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य बरामद किए हैं। जब्त की गई संपत्तियों और सामानों की सूची इस प्रकार है:

कीमती जेवरात: 28 लाख रुपये मूल्य के सोने और हीरे के गहने (लगभग 15 तोले सोना)।

कैश: 1 लाख 52 हजार रुपये नगद।

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स: 29 स्मार्टफोन, 3 लैपटॉप और 2 आईपैड।

बैंकिंग दस्तावेज: 85 एटीएम (ATM) कार्ड, 18 बैंक पासबुक और फर्जी बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज।

टेलीकॉम सामग्री: 45 एक्टिवेटेड सिम कार्ड।

सख्त धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई

पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं जैसे ७, ११२, ६१(२), ३१७(२), ३१७(३), ३१७(४), ३१८(४) और नए टेलीकॉम अधिनियम की धारा ४२ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

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