मप्र को दुग्ध उत्पादन में नंबर-वन बनाने का संकल्प : ग्वालियर में सीएम डॉ. यादव ने दिया उन्नत और प्राकृतिक खेती का मंत्र

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए केवल पारंपरिक खेती काफी नहीं है। किसानों को बहु-फसली प्रणाली (एक से अधिक फसलें उगाना) और आधुनिक पशुपालन को अपनाना होगा। सरकार इसी दिशा में प्राकृतिक खेती और डेयरी क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन दे रही है। मुख्यमंत्री सोमवार, 6 जुलाई 2026 को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित संभागीय कृषि कार्यशाला में किसानों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने एक बड़ा लक्ष्य साझा करते हुए कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे पायदान पर है, लेकिन अगले पांच वर्षों के भीतर इसे शीर्ष (नंबर वन) स्थान पर लाया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर और सांची दुग्ध संघों को वित्तीय व तकनीकी सहायता दी जा रही है।
₹13 करोड़ की हाईटेक नर्सरी की आधारशिला
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से ग्वालियर के खुरैरी और जहांगीरपुर में बनने वाली अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी और फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) गार्डन के पहले चरण का भूमिपूजन किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इस परियोजना पर लगभग 13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने बागवानी, मत्स्य और कृषि क्षेत्र से जुड़े लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं के हितलाभ सौंपे।
कृषि और किसानों के लिए अहम घोषणाएं व उपलब्धियां
100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य: मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 2003 में राज्य का सिंचाई क्षेत्र महज 7.5 लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर लगभग 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। चंबल-पार्वती-कालीसिंध और केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओं की मदद से इस रकबे को 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
ऋण चुकाने के लिए अब पूरा एक साल: किसानों को बड़ी राहत देते हुए सीएम ने कहा कि अब 31 मार्च तक कृषि ऋण चुकाने की बाध्यता और चिंता खत्म कर दी गई है। किसानों को कर्ज अदायगी के लिए पूरे एक वर्ष का समय दिया जा रहा है।
महानगरों में खुलेंगी भव्य गौशालाएं: गौ-संरक्षण पर जोर देते हुए डॉ. यादव ने कहा कि शहरों से पुरानी ‘खिड़क प्रणाली’ को समाप्त कर बड़े पैमाने पर आधुनिक गौशालाएं बनाई जा रही हैं। ग्वालियर की प्रसिद्ध लाल टिपारा गौशाला की तर्ज पर अब भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी विशाल गौशालाएं स्थापित की जाएंगी, जहां स्वदेशी गायों की नस्ल सुधारने का काम होगा।
कृषि विश्वविद्यालय में नई इकाइयों का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में दो आधुनिक व्यावहारिक मॉडलों का उद्घाटन किया:
समन्वित कृषि प्रणाली इकाई (Integrated Farming System): इस मॉडल में खेती, डेयरी, बकरी-मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन और जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियां एक साथ जुड़ी हैं, जिससे एक इकाई का कचरा दूसरी इकाई के लिए कच्चे माल का काम करता है और लागत कम होती है।
बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई (Multi-tier Cropping System): इसके तहत एक ही खेत में अलग-अलग ऊंचाई की फसलें वैज्ञानिक तरीके से उगाई जाती हैं, ताकि धूप, पानी और जमीन का भरपूर उपयोग हो सके।
किसानों ने साझा किए नवाचार के अनुभव
कार्यशाला के दौरान स्थानीय किसानों ने प्राकृतिक खेती के अपने सफल प्रयोग साझा किए। ग्राम बिलौआ के किसान प्राण सिंह माथुर ने बताया कि उन्होंने अमरूद की दो नई किस्में ‘बिलौआ-22’ और ‘बिलौआ-रेड’ विकसित कर उनका पेटेंट कराया है। वे अब तक 50 हजार से अधिक किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। इसी तरह देवरा के बृजेंद्र रावत और भगवानपुरा के देवराज कुशवाह ने रासायनिक खाद छोड़कर प्राकृतिक तरीके से बंपर पैदावार लेने के अपने अनुभव सुनाए।
सामाजिक सरोकार: पर्यावरण और सड़क सुरक्षा
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा अभियान के तहत 50 नागरिकों को हेलमेट वितरित किए और सुरक्षित ड्राइविंग की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत आम का पौधा भी रोपा।
इस भव्य कार्यक्रम में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित कई स्थानीय सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
















