छत्तीसगढ़

कृषि में आधुनिकता की नई बयार : अब सहकारी समितियों से मिलेगी ‘ड्रोन स्प्रेयर’ की सुविधा, मंत्री टंक राम वर्मा ने किया योजना का आगाज़

बलौदाबाजार-भाटापारा। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले ने खेती-किसानी को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। जिले की 5 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में ‘ड्रोन स्प्रेयर’ सेवा की आधिकारिक शुरुआत की गई है। नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित एक समारोह में प्रदेश के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने पूजा-अर्चना कर इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया।

कार्यक्रम के दौरान बारिश की हल्की फुहारों के बीच कुशल ड्रोन पायलटों ने तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया। उन्होंने दिखाया कि कैसे ड्रोन के ज़रिए खाद और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव कर समय और पैसों की बचत की जा सकती है।

कम लागत में बेहतर फसल प्रबंधन: टंक राम वर्मा

समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने इस दिन को जिले की कृषि यात्रा के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से कम समय में बड़े भू-भाग पर कीटनाशकों का संतुलित छिड़काव संभव होगा। इससे किसानों के श्रम और लागत में भारी कमी आएगी, साथ ही खेतों में पैदल न जाने से खड़ी फसलों का नुकसान भी बचेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ‘ड्रोन दीदी’ पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए रोज़गार व कौशल विकास के नए रास्ते खुलेंगे।

जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर लौटें किसान

रसायनों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए राजस्व मंत्री ने कृषकों को जैविक व प्राकृतिक खेती अपनाने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने और खाद्यान्न की गुणवत्ता सुधारने के लिए हमारी पारंपरिक व सतत (सस्टेनेबल) कृषि पद्धतियों की ओर लौटना बेहद आवश्यक है।

5 समितियों में 11 ड्रोन तैनात; 50 हजार एकड़ का लक्ष्य

सहकारिता विभाग ने चालू वर्ष में ड्रोन तकनीक के माध्यम से लगभग 50 हजार एकड़ क्षेत्र में छिड़काव करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शुरुआती चरण में यह सेवा जिले की 5 प्रमुख समितियों में शुरू की गई है:

बलौदाबाजार

कसडोल

बया

गिर्रा (पलारी)

दामाखेड़ा (सिमगा)

इन समितियों में कुल 11 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं।

किसानों के लिए बुकिंग प्रक्रिया:

किसानों को अपनी संबंधित समिति में जाकर खेत का रकबा (क्षेत्रफल) और छिड़काव की तारीख दर्ज कराकर रसीद कटवानी होगी। तय तिथि पर ड्रोन पायलट मशीन के साथ खेत पर पहुँचेंगे। किसान को केवल अपनी खाद या दवा उपलब्ध करानी होगी, जिसके लिए एक तय प्रति-एकड़ शुल्क लिया जाएगा।

मिनी बैंक बनीं समितियां, डिजिटलाइजेशन से मिली राहत

समारोह के दौरान ज़िला कलेक्टर ने बताया कि जिले की सभी प्राथमिक सहकारी समितियाँ अब पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत (Digitized) हो चुकी हैं। ये समितियाँ ‘सीएससी’ (CSC) और ‘मिनी बैंक’ के रूप में काम कर रही हैं, जहाँ माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध है। अब किसानों को छोटे-मोटे लेनदेन (10 से 20 हज़ार रुपये) के लिए बड़े बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान खरीदी में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 17 समिति प्रबंधकों और ई-पैक्स (e-PACS) में सराहनीय कार्य करने वाले 10 कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त:

9 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के चेक दिए गए।

2 कृषकों को लर्निंग लाइसेंस वितरित किए गए।

इस अवसर पर स्थानीय नगरपालिका अध्यक्ष, पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा, जिला पंचायत के पदाधिकारी, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष, सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान उपस्थित रहे।

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