न्यायिक रिपोर्टिंग में लापरवाही पर भड़के सीजेआई सूर्यकांत : कहा— ‘जब अर्जी ही नहीं आई, तो खारिज कैसे करता?’

नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मीडिया में आई एक भ्रामक खबर पर कड़ा रुख अपनाया है। सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि अदालत द्वारा सुनवाई से इनकार करने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद और गलत हैं, क्योंकि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में कोई औपचारिक याचिका दायर ही नहीं की गई थी।
मामले की मुख्य बातें:
केवल एक पत्र मिला था: सीजेआई ने स्पष्ट किया कि ‘मिश्रा’ नामक एक व्यक्ति की ओर से महज एक अनुरोध पत्र (प्रतिनिधित्व) भेजा गया था। इसे आधिकारिक याचिका नहीं माना जा सकता।
रजिस्ट्री से पुष्टि: सुबह 10 बजे तक कोर्ट की रजिस्ट्री में इस मामले से जुड़ा कोई भी वैधानिक दस्तावेज या याचिका दर्ज नहीं की गई थी।
गैर-जिम्मेदाराना कवरेज पर नाराजगी: मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पिछले दो दिनों से मीडिया में यह गलत संदेश फैलाया गया कि मामला खारिज कर दिया गया। बिना जांचे-परखे इस तरह की खबरें चलाना गैर-जिम्मेदाराना है।
“जब तक नियमानुसार कोई रिट याचिका दाखिल न हो, केवल एक पत्र के आधार पर उसे कोर्ट केस नहीं माना जा सकता। मीडिया को अदालत से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में अधिक सावधानी और जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।”
— सीजेआई सूर्यकांत
इस घटनाक्रम के बाद से न्यायिक कार्यवाहियों की मीडिया कवरेज में तथ्यात्मक सत्यता और गोपनीयता को लेकर कानूनी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।
















