अद्भुत आस्था : मां मातंगी धाम, जहाँ घड़ी बंद होते ही शुरू होता है ‘शुभ समय’

रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले (कुरुद विकासखंड) के जीजामगांव-बिरेझर स्थित ‘मां मातंगी देवी धाम’ अपने अनूठे रीति-रिवाजों और चमत्कारिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। राजधानी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह पवित्र स्थल श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र है।
घड़ी रुकते ही बदलती है किस्मत
मंदिर के मुख्य पुजारी हरिओम महाराज के अनुसार, इस धाम की सबसे अनोखी परंपरा परिसर में दीवार घड़ी बांधना है। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मनोकामना के साथ यहाँ दीवार घड़ी टाँगते हैं और माना जाता है कि जैसे ही वह घड़ी चलना बंद होती है, व्यक्ति के जीवन से दुर्दशा खत्म होकर ‘सुनहरा समय’ शुरू हो जाता है।
इसके अलावा, यहाँ मन्नत की पूर्ति के लिए:
लाल वस्त्र में लिपटा नारियल अर्पित किया जाता है।
लोहे की श्रृंखलाओं (जंजीर) के साथ घंटियाँ बांधी जाती हैं।
ताला और अन्य मन्नत सामग्री बांधने का भी प्रचलन है।
दूसरे राज्यों से भी पहुँचते हैं श्रद्धालु
धाम की अलौकिक ख्याति केवल छत्तीसगढ़ तक ही सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों से भी हर दिन सैकड़ों भक्त अपनी समस्याओं के निवारण और मन्नत मांगने यहाँ आते हैं।
भक्तों के बोल:
कोरबा से आईं श्रद्धालु कमला साहू ने बताया कि जीवन के संकटों और बाधाओं से मुक्ति पाने के विश्वास के साथ वे यहाँ मन्नत माँगने आई हैं। वहीं दुर्ग की ज्योति साहू का कहना है कि उन्होंने लंबे समय से इस मंदिर की अनूठी परंपराओं के बारे में सुन रखा था, जिसके बाद वे स्वयं मां मातंगी के दर्शन करने यहाँ पहुँचीं।











