नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार : झारखंड में 6 इनामी कमांडरों सहित 16 माओवादियों का आत्मसमर्पण

रांची (एजेंसी)। झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान ‘ऑपरेशन नवजीवन’ को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के निरंतर दबाव तथा प्रभावी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 16 नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्याग दिया है। इनमें ₹39 लाख के कुल संयुक्त इनाम वाले 6 कुख्यात माओवादी कमांडर भी शामिल हैं।
सभी नक्सलियों ने रांची पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्र और सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए।
मुख्य बातें और प्रमुख अपडेट
हथियार और कारतूस समर्पित: माओवादियों ने सुरक्षा बलों को 11 आधुनिक ऑटोमैटिक हथियार (2 एके-47, 6 इंसास, 1 एम-16, 1 एचके-33 और 1 यूएस कार्बाइन) के साथ 38 मैगजीन और 1,562 जिंदा कारतूस सौंपे।
प्रमुख इनामी चेहरे:
संतोष उर्फ बासुदेव दा (रीजनल कमेटी सदस्य): ₹15 लाख का इनामी, जिस पर अकेले 128 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
चंदन लोहरा (जोनल कमेटी सदस्य): ₹10 लाख का इनामी, 78 मामलों में नामजद।
अनिल तुरी व सुखलाल बिरंजिया (सब-जोनल सदस्य): ₹5-5 लाख के इनामी।
सुदेश होनहागा व रिसिव सोय (एरिया कमेटी सदस्य): ₹2-2 लाख के इनामी।
शीर्ष नेता का बॉडीगार्ड शामिल: आत्मसमर्पण करने वालों में देवान मुर्मू भी शामिल है, जो ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा का मुख्य अंगरक्षक रह चुका है।
425 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्यधारा में लौटे इन 16 उग्रवादियों पर झारखंड के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में कुल 425 मामले दर्ज हैं। इनमें सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमले, हत्याएं, लेवी (रंगदारी) वसूली और आईईडी विस्फोट जैसी कई गंभीर घटनाएं शामिल हैं।
पुनर्वास नीति का लाभ:
राज्य पुलिस प्रशासन के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी पूर्व नक्सलियों को सरकार की समर्पित आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के तहत वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
















