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सीएम साय और केंद्रीय मंत्री सिंधिया के बीच छत्तीसगढ़ के डिजिटल विस्तार पर मंथन

नई दिल्ली (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली स्थित संचार भवन में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य के दूरस्थ, वनांचल और सीमावर्ती क्षेत्रों में दूरसंचार एवं इंटरनेट सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण रहा।

2,305 नए मोबाइल टावरों की मांग: वनांचल के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा नेटवर्क

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के डिजिटल समावेशन के लिए डिजिटल भारत निधि (DBN) के तहत 2,305 नए मोबाइल टावरों की त्वरित मंजूरी का आग्रह किया।

विकास का आधार: सीएम साय ने कहा कि सुदूर अंचलों में मजबूत इंटरनेट नेटवर्क सिर्फ बातचीत का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम है।

मिलेगी सीधी पहुंच: हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से सुदूर क्षेत्रों के नागरिक ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और बैंकिंग सेवाओं से सीधे जुड़ सकेंगे।

बस्तर और दुर्गम क्षेत्रों के लिए 577 टावरों की स्वीकृति पर आभार
केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में स्वीकृत 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री और केंद्र सरकार का धन्यवाद ज्ञापन किया।

“जिन क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा का नया दौर शुरू हो चुका है, वहां डिजिटल कनेक्टिविटी विकास की गति को कई गुना बढ़ा देगी।”
— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)

ज़मीनी कार्रवाई तेज़: BSNL को 489 स्थानों के लिए NOC जारी

राज्य सरकार नेटवर्क विस्तार को लेकर अत्यंत गंभीर है और प्रक्रियाओं में तेज़ी ला रही है:

विवरण, स्थिति

कुल स्वीकृत टावर स्थान,577
NOC जारी (BSNL),489
प्रक्रियाधीन स्थान,88 (शीघ्र स्वीकृति की उम्मीद)

प्रशासनिक बाधाओं को दूर करते हुए BSNL ने चिन्हित स्थानों पर टावर लगाने का काम शुरू कर दिया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और बस्तर का बदलेगा स्वरूप

डिजिटल विस्तार के साथ ही प्रदेश में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:

डिजिटल शिक्षा: वनांचल के छात्रों को ऑनलाइन पाठ्य सामग्री और ई-लर्निंग के अवसर मिलेंगे।

टेलीमेडिसिन: विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह अब गांवों में बैठे-बैठे ही संभव होगी।

बस्तर का सशक्तिकरण: सड़क और बिजली के बाद अब बस्तर को डिजिटल कनेक्टिविटी से मजबूत किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं, किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों को नए अवसर मिलेंगे।

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