72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स : छत्तीसगढ़ के रामनामी पंथ पर बनी डॉक्यूमेंट्री को मिला सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का खिताब

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति और अनूठी आध्यात्मिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। राज्य के रामनामी पंथ के जीवन और आस्था पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘Ram-Nami’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ के सम्मान से नवाजा गया है। गुजरात के एकता नगर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फिल्म के निर्देशक, लेखक और निर्माता भरतलाल गणपत को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ यह पुरस्कार समारोह ऐतिहासिक रहा, क्योंकि इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन देश की राजधानी नई दिल्ली से बाहर किया गया था।
भक्ति और परंपरा का जीवंत चित्रण
यह वृत्तचित्र छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की सदियों पुरानी परंपराओं, उनके संघर्षों और जीवनशैली का यथार्थवादी चित्रण करता है। इस समाज की मुख्य विशेषता उनके शरीर पर राम नाम का टैटू (गोदना) गुदवाना और अपने संपूर्ण जीवन को इस भक्ति में समर्पित करना है। फिल्म में प्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर की आवाज ने इस सांस्कृतिक यात्रा को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है।
“सम्मान पाना नहीं, कहानी दुनिया तक पहुँचाना था उद्देश्य”
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद निर्देशक भरतलाल गणपत ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ और रामनामी समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने साझा किया कि इस फिल्म के निर्माण का मुख्य उद्देश्य पुरस्कार हासिल करना नहीं, बल्कि इस अनूठी लोक-परंपरा को दुनिया के सामने लाना था।
उन्होंने बताया कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान स्थानीय समाज का भरपूर सहयोग मिला, जिससे वे रामनामी समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को पूरी प्रामाणिकता के साथ पर्दे पर उतार सके। सिनेमा और विज्ञापन क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाले भरतलाल गणपत के अनुसार, यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीत है।
















