बस्तर में बड़ा नक्सली सरेंडर : 35 लाख के इनामी 6 माओवादियों ने छोड़ा हथियार, ओडिशा तक था नेटवर्क

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पश्चिम बस्तर और पड़ोसी राज्य ओडिशा में लंबे समय से सक्रिय रहे 35 लाख रुपये के कुल इनामी 6 कुख्यात माओवादियों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस सरेंडर से छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय नक्सलियों के अंतर-राज्यीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
सामूहिक आत्मसमर्पण: सरेंडर करने वाले इन 6 कैडरों पर शासन की ओर से कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
ओडिशा कनेक्शन: इस बार के आत्मसमर्पण में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा में सक्रिय 4 माओवादी कैडर भी शामिल हैं, जो कंपनी नंबर-08 और शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा में तैनात थे।
प्रमुख सरेंडर करने वाले माओवादी:
कोसा माड़वी उर्फ सतीश (PPCM): साल 2005 से सक्रिय। यह 2006 के NMDC CISF कैंप हमले और 2024 के चर्चित तेकुलगुड़ा कैंप हमले जैसी बड़ी वारदातों में शामिल रहा है।
सुक्कू कुड़ियम: यह ओडिशा के सीसी स्टाफ (CC Staff) का सुरक्षा गार्ड था और इसके पास एके-47 जैसा खतरनाक हथियार रहता था।
रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (PPCM): अप्रैल 2018 में ओडिशा में मतदान दल पर हुए हमले (जिसमें 2 जवान शहीद हुए थे) और इस साल जनवरी में कोनारी जंगल मुठभेड़ में शामिल रही है।
लालू ताती (PM): गंगालूर एरिया कमेटी और बटालियन नंबर-01 का सदस्य, जो तेकुलगुड़ा और एलमागुंडा कैंप पर हुए हमलों में सक्रिय रहा।
देवे मड़कम: यह भी ओडिशा के शीर्ष माओवादी नेता और एसजेडसीएम जगदीश इरपा के सुरक्षा दस्ते में रह चुका है।
मुख्यधारा में वापसी की वजह
सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे लगातार अभियानों, बीजापुर क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों और छत्तीसगढ़ सरकार की प्रभावी पुनर्वास एवं कौशल विकास नीति से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इनके आत्मसमर्पण से क्षेत्र में शांति स्थापना के प्रयासों को और गति मिलेगी।
















