मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के हेल्थ सेक्टर में AI का नया दौर : उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ‘मोदी 25 कॉन्क्लेव’ में साझा किया विकास का रोडमैप

भोपाल (एजेंसी)। राजधानी भोपाल में आयोजित “मोदी 25: विकसित भारत, बढ़ता मध्यप्रदेश” कॉन्क्लेव में राज्य के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे के आधुनिकीकरण, तकनीक के समावेश, औद्योगिक निवेश, टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर राज्य सरकार की रणनीतियों और भावी योजनाओं को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई प्रमुख बातें:

  1. AI आधारित मेडिकल सर्विस और टेलीमेडिसिन का विस्तार

प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र को अत्याधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा बढ़ाया जा रहा है। टीबी (TB) की पहचान के लिए AI युक्त एक्स-रे तकनीक इस्तेमाल में लाई जा रही है, जबकि रोबोटिक्स और एडवांस डायग्नोस्टिक्स पर काम जारी है। वहीं, ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ और प्राथमिक केंद्रों के जरिए गांव के मरीजों को घर के पास ही बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञों से वीडियो कंसल्टेशन (टेलीमेडिसिन) की सुविधा दी जा रही है।

  1. मातृ-शिशु मृत्यु दर को ‘शून्य’ करने का लक्ष्य

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सरकार हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर, जांच सुविधाओं और जन-जागरूकता पर एक साथ काम कर रही है। कुपोषण और गंभीर एनीमिक गर्भवती महिलाओं की पहचान कर शुरुआती चरण में ही इलाज मुहैया कराया जा रहा है, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों तक की भूमिका तय की गई है।

  1. आयुष्मान भारत में पारदर्शिता और मजबूत लोकल डायग्नोस्टिक्स

मध्यप्रदेश में लगभग 4.5 करोड़ नागरिकों को आयुष्मान कार्ड का लाभ मिला है, जिसके तहत 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम निपटाए जा चुके हैं। योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन और गड़बड़ी मिलने पर FIR जैसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही, जिला अस्पतालों की IPHL लैब्स में 134 प्रकार के टेस्ट मुफ्त किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर न काटने पड़ें।

  1. दवाओं की सख्त जांच प्रक्रिया

सरकारी अस्पतालों में बांटी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, इसके लिए NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से रिपोर्ट ओके मिलने के बाद ही बैच बांटे जाते हैं। इसके अलावा, ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा रैंडम चेकिंग और एक्सपायर्ड दवाओं पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।

  1. रीवा में 750 बेड का अस्पताल और कैंसर केयर सेंटर

विंध्य अंचल के लिए रीवा में 750 बिस्तरों वाले मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण अंतिम चरण में है, जिससे संजय गांधी अस्पताल का बोझ कम होगा। इसके साथ ही, जनवरी तक रीवा में कैंसर ब्लॉक चालू करने का लक्ष्य है, जहाँ लीनियर एक्सीलरेटर, ब्रेकीथेरेपी और पेट (PET) स्कैन जैसी आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं।

  1. निवेश, बुनियादी ढांचा और पर्यटन में तेजी

इंडस्ट्री व कनेक्टिविटी: रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से हर संभाग में निवेश लाया जा रहा है। बेहतर सड़कें, रेल और रीवा जैसे शहरों में हवाई कनेक्टिविटी से औद्योगिक माहौल सुधरा है।

सिंचाई का दायरा: प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 54 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 1 करोड़ हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।

टूरिज्म व वन्यजीव: महाकाल लोक (उज्जैन), ओंकारेश्वर, चित्रकूट के साथ-साथ कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट और विंध्य की ‘व्हाइट टाइगर सफारी’ ने मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पटल पर नई पहचान दिलाई है।

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