छत्तीसगढ़

संविधान शिल्पी बाबा साहेब के आदर्शों से गढ़ा जाएगा समृद्ध छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उन्हें भावपूर्ण नमन किया। मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए उन्हें सामाजिक समरसता और मानवाधिकारों का सबसे बड़ा पैरोकार बताया।

वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित जीवन

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा कि बाबा साहेब ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उस वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए अर्पित कर दिया, जो सदियों से उपेक्षित और शोषित था। उन्होंने एक ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना की थी जहाँ जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर भेदभाव न हो, बल्कि हर नागरिक को उन्नति के समान अवसर प्राप्त हों।

शिक्षा: प्रगति का मूल मंत्र

बाबा साहेब के विचारों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

“डॉ. आंबेडकर का मानना था कि शिक्षा ही वह अस्त्र है, जिससे समाज में व्याप्त कुरीतियों और असमानता को जड़ से मिटाया जा सकता है। उनका जीवन संघर्ष हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ज्ञान के बल पर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।”

राज्य सरकार की प्रतिबद्धता

छत्तीसगढ़ सरकार की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए श्री साय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार बाबा साहेब के ‘अंत्योदय’ के सपने को साकार कर रही है। राज्य की नीतियां समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के लक्ष्य से प्रेरित हैं। सरकार का मुख्य ध्यान निम्नलिखित क्षेत्रों पर है:

समान अवसर: शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करना।

सामाजिक सुरक्षा: वंचित वर्गों के लिए स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाएं।

सशक्त छत्तीसगढ़: प्रदेश के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाकर एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करना।

जनता से आह्वान

लेख के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे केवल बाबा साहेब की जयंती ही न मनाएं, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए बंधुत्व और समानता के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लें। उन्होंने जोर दिया कि एक सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सामाजिक एकजुटता अनिवार्य है।

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