आत्मनिर्भरता की नई मिसाल : रजनी उइके के हौसलों ने दिलाई ‘लखपति दीदी’ की पहचान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की लहर अब ग्रामीण क्षेत्रों के घरों तक पहुँच रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही सरकारी योजनाओं ने महिलाओं को केवल चूल्हे-चौके तक सीमित न रखकर उन्हें सफल उद्यमी बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसी बदलाव की एक जीवंत तस्वीर कोरबा जिले के कटघोरा ब्लॉक की श्रीमती रजनी उइके हैं।
शिक्षा से स्वावलंबन का सफर
ग्राम पंचायत बतारी की रहने वाली रजनी उइके ने स्नातक (B.A.) तक की पढ़ाई की है। शिक्षित होने के कारण वे हमेशा से कुछ अपना काम शुरू करना चाहती थीं। उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव साल 2022 में आया, जब उन्हें ‘बिहान योजना’ की जानकारी मिली। उन्होंने अपनी आकांक्षाओं को उड़ान देने के लिए ‘जय लक्ष्मी स्व-सहायता समूह’ की सदस्यता ली।
विविध व्यवसायों से बदली तकदीर
समूह से जुड़ने के बाद रजनी को न केवल उचित प्रशिक्षण मिला, बल्कि आर्थिक संबल भी प्राप्त हुआ। उन्होंने अपनी उद्यमशीलता को विस्तार देने के लिए विभिन्न स्रोतों से मदद ली:
वित्तीय सहायता: उन्हें RF मद से 8 हजार और CIF मद से 30 हजार रुपये प्राप्त हुए।
बैंक ऋण: व्यवसाय को बड़ा रूप देने के लिए उन्होंने बैंक से 1.5 लाख रुपये का लोन लिया।
बहुआयामी व्यापार: इस राशि से उन्होंने एक ही छत के नीचे पोल्ट्री फार्म, फोटोकॉपी की दुकान और चॉइस सेंटर की शुरुआत की।
सफलता के मायने: अब बनीं ‘लखपति दीदी’
आज रजनी उइके इन सभी व्यवसायों को कुशलतापूर्वक संभाल रही हैं। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि उनकी सालाना आय अब 1 लाख 10 हजार रुपये के पार जा चुकी है।
“पहले घर की आर्थिक जिम्मेदारी सिर्फ मेरे पति पर थी, लेकिन आज मैं कंधे से कंधा मिलाकर परिवार का बोझ उठा रही हूँ। शासन की योजनाओं ने मुझे न केवल रोजगार दिया, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक पहचान भी दिलाई है।”
— रजनी उइके
रजनी की यह सफलता कहानी प्रदेश की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि कैसे सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से एक गृहिणी ‘लखपति दीदी’ बनकर अपने परिवार और समाज का गौरव बढ़ा सकती है।
















