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बाबा तुंगनाथ के खुले द्वार : हिमालय के सर्वोच्च शिवालय में भक्ति का सैलाब

देहरादून (एजेंसी)। विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर के रूप में विख्यात, पंचकेदारों में से एक तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। वैदिक मंत्रों की गूंज और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच, शुभ मिथुन लग्न में दोपहर 11:00 बजे मंदिर के द्वार खोले गए, जिससे अब आगामी छह महीनों तक भक्त बाबा के दर्शन उनके धाम में ही कर सकेंगे।

यात्रा का आध्यात्मिक सफर

भगवान तुंगनाथ की इस पावन यात्रा की शुरुआत 20 अप्रैल से हुई थी:

20 अप्रैल: बाबा की चल-विग्रह डोली ने अपने शीतकालीन प्रवास मक्कूमठ (मर्कटेश्वर मंदिर) से विदा ली और रात्रि विश्राम भूतनाथ मंदिर में किया।

21 अप्रैल: डोली अपने दूसरे पड़ाव चोपता पहुंची, जहां भक्तों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया।

23 अप्रैल (बुधवार): सुबह डोली चोपता से रवाना होकर तुंगनाथ धाम पहुंची, जिसके बाद मुख्य पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर मंदिर के कपाट खोले गए।

श्रद्धालुओं का उत्साह और व्यवस्थाएं

कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरी केदार घाटी भक्तिमय हो गई। कपाट खुलने के तुरंत बाद भगवान की विशेष आरती की गई और विश्व शांति व जन-कल्याण की प्रार्थना की गई।

मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण, प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं और पैदल मार्ग पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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