छत्तीसगढ़

ईसाई परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने पर चर्च कमेटी के पादरी सहित 7 पर केस दर्ज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सीएनआई चर्च कमेटी के पादरी समेत कुल सात पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन सभी पर एक ईसाई परिवार को समाज से बेदखल करने और उनका हुक्का-पानी बंद करने का गंभीर आरोप है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना बिलासपुर के कोटा थाना क्षेत्र की है। पीड़ित हरीश लाल और उनके परिवार का आरोप है कि सीएनआई चर्च कमेटी ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। कमेटी ने न सिर्फ समाज में, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक फरमान जारी कर लोगों से अपील की थी कि कोई भी इस परिवार से किसी भी प्रकार का संबंध न रखे। उन्हें समाज के सुख-दुख के कार्यक्रमों से भी दूर रहने को कहा गया, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहा था।

दो साल से चल रहा था विवाद

पीड़ित हरीश लाल के अनुसार, यह प्रताड़ना पिछले दो सालों से चल रही थी, जब से चर्च में नई कमेटी का गठन हुआ था। 17 जनवरी को चर्च की एक बैठक के दौरान उन पर यह झूठा आरोप लगाया गया कि वे क्रिसमस और ईस्टर जैसे पवित्र त्योहारों का अनादर कर रहे हैं। इसके बाद कमेटी ने उनके परिवार को ‘नॉट इन गुड स्टैंडिंग’ (समाज में अच्छी स्थिति में न होना) बताते हुए समाज से निष्कासित कर दिया।

कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एक्शन

पीड़ित परिवार ने शुरुआत में कोटा थाने में न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार, परिवार ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीप्ति बरवा की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कोटा पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला:

अदालत के निर्देश पर पुलिस ने पास्टर मनीष आर. मसीह, सौरभ पीटर्स, राजा सालोमान दास, अनिल मसीह, थियोडोर पीटर्स, सुनीलेश पीटर्स और सुलेमान दास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत नफरत फैलाने, धमकी देने और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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