छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब अनिवार्य होंगी सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां, नया शेड्यूल जारी

रायपुर। स्कूलों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए पूरे दिन की कार्यप्रणाली को तीन मुख्य हिस्सों में तय किया गया है: सुबह की प्रार्थना सभा: स्कूल शुरू होते ही सबसे पहले असेंबली (प्रार्थना सभा) होगी। इसमें राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, सरस्वती वंदना, दीपमंत्र और गुरु मंत्र का उच्चारण किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को देश के महान नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन संघर्ष से रूबरू कराया जाएगा।
मध्यान्ह भोजन (लंच टाइम): दोपहर में भोजन ग्रहण करने से पहले सभी छात्र-छात्राएं एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ करेंगे।
स्कूल की छुट्टी का समय: शाम को विद्यालय की समाप्ति पर राज्यगीत “अरपा पैरी के धार”, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र के गायन के साथ छुट्टी होगी।
नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग का उद्देश्य इस पहल के जरिए बच्चों में देशभक्ति, अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान और बेहतर जीवन मूल्यों का विकास करना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर स्कूलों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज विजिट) करें। यदि किसी भी स्कूल में इन नियमों के पालन में लापरवाही पाई जाती है, तो वहां के प्राचार्य (प्रिंसिपल) और प्रबंधन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
16 जून से ‘शाला प्रवेश उत्सव’ के साथ खुलेंगे स्कूल
गर्मी की छुट्टियों के बाद छत्तीसगढ़ के सभी विद्यालय 16 जून 2026 से दोबारा खुलने जा रहे हैं। नए सत्र के पहले दिन को यादगार बनाने के लिए विभाग ‘शाला प्रवेश उत्सव 2026’ का आयोजन कर रहा है। इसके लिए स्कूलों में साफ-सफाई, किताबों के वितरण और समय-सारणी (टाइम टेबल) को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। साथ ही, पहले ही दिन से शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
















