विकास ही एकमात्र रास्ता : राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने ग्राम टंडवा को दी ₹8.32 करोड़ के निर्माण कार्यों की सौगात

रायपुर। रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड स्थित ग्राम टंडवा में क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जन-सुविधाओं को मजबूती देने के लिए ₹8.32 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं की नींव रखी गई और पूर्ण हो चुके कार्यों का उद्घाटन किया गया। प्रदेश के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में इन विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण संपन्न हुआ।
इन प्रमुख परियोजनाओं का हुआ शुभारंभ और लोकार्पण
सड़क निर्माण (भूमिपूजन):
₹444.55 लाख की लागत से दैहानपारा से झोपड़ा पारा बैकुंठ सड़क (लंबाई: 2.675 किमी)
₹387.69 लाख की लागत से टंडवा से बैकुंठ सड़क (लंबाई: 2.65 किमी)
स्कूल अधोसंरचना (लोकार्पण):
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला परिसर में ₹10 लाख का प्रार्थना शेड
छात्रों की सुविधा के लिए ₹5 लाख का साइकिल स्टैंड
“वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, आवागमन होगा आसान”
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों और स्थानीय प्रतिनिधियों की यह सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से लंबित थी। उन्होंने स्मरण कराया कि 2018 में भी इस मार्ग की स्वीकृति मिली थी, लेकिन किसी वजह से काम अटक गया था। अब न केवल इस मार्ग का काम शुरू हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों को दो मुख्य सड़कों की दोहरी सौगात मिली है।
इन पक्की सड़कों के बनने से क्षेत्र के विद्यार्थियों, रोज़ाना काम पर जाने वाले मजदूरों, व्यापारियों और आम लोगों के समय की बचत होगी और यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगी।
ढाई सालों में ₹77 लाख के कार्य:
मंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान ग्राम पंचायत क्षेत्र में करीब 77 लाख रुपये के विविध कार्य कराए गए हैं—जिनमें स्मार्ट क्लास, महतारी सदन, पीडीएस भवन, पार्क, शौचालय निर्माण, शेड और साइकिल स्टैंड जैसी जनहितकारी सुविधाएं शामिल हैं।
युवाओं और विद्यार्थियों को दिया जीवन का संदेश
अपने प्रशासनिक, राजनीतिक और छात्र जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा:
राजनीति का वास्तविक अर्थ: “सत्ता का प्रदर्शन राजनीति नहीं है, बल्कि गरीबों का दुख दूर करना, समाज सेवा करना और विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सही राजनीति है।”
कर्म ही पहचान: “किसी व्यक्ति का कद दूसरों द्वारा की गई तारीफ या आलोचना से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से तय होता है। पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करते रहें।”
परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं: उन्होंने रामचरितमानस के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा कि दूसरों की मदद करना और उनके चेहरे पर खुशी लाना ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।
















