मास्को और बीजिंग के बीच कूटनीतिक सक्रियता : सर्गेई लावरोव की महत्वपूर्ण चीन यात्रा

बीजिंग (एजेंसी)। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मंगलवार को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे। इस यात्रा को अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों महाशक्तियां यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व के संकट पर अपने रुख को साझा करने वाली हैं।
रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, लावरोव अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ गहन चर्चा करेंगे। इस बैठक के मुख्य एजेंडे निम्नलिखित हैं:
द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी: दोनों देश विभिन्न स्तरों पर अपने आपसी संबंधों और सहयोग को और अधिक विस्तार देने पर विचार करेंगे।
बहुपक्षीय मंचों पर एकजुटता: संयुक्त राष्ट्र (UN), ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी-20 जैसे वैश्विक मंचों पर रूस और चीन अपनी साझा रणनीति को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
क्षेत्रीय संकट: यूक्रेन में जारी संघर्ष और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर दोनों देशों के बीच विचारों का विस्तृत आदान-प्रदान होगा।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का उद्देश्य न केवल आपसी संबंधों का विकास है, बल्कि साझा चिंता वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख में तालमेल बिठाना भी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर चिंता
इस कूटनीतिक हलचल के बीच, मास्को ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित खतरों के प्रति भी आगाह किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य की संभावित नाकेबंदी पर चिंता व्यक्त की।
“इस तरह की कार्रवाइयों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना लगभग तय है। हालांकि, स्थिति के कई पहलू अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।”
— दिमित्री पेस्कोव, रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि लावरोव की यह यात्रा दर्शाती है कि पश्चिमी दबाव के बावजूद रूस और चीन अपने संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
















