बस्तर की फुलमती बनीं प्रेरणा : आधुनिक कृषि पद्धतियों से हासिल की आर्थिक आजादी

रायपुर। शारदीय नवरात्रि के दौरान जब पूरा क्षेत्र मां दुर्गा और दंतेश्वरी मैया की भक्ति में मग्न है, वहीं बस्तर की ग्रामीण महिलाएं अपनी लगन और मेहनत से स्वावलंबन की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर’ से जुड़कर ‘मां दंतेश्वरी उमा स्वयं सहायता समूह’ की सदस्य फुलमती दीदी ने कृषि क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
ग्राम ईरिकपाल की रहने वाली फुलमती ने पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया। उन्होंने अपने खेतों में मल्चिंग तकनीक, मचान विधि और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए नकदी सब्जियों की खेती शुरू की। सही मार्गदर्शन और निरंतर परिश्रम का नतीजा यह रहा कि वे अब तक 10 क्विंटल से अधिक गुणवत्तापूर्ण हरी सब्जियों का उत्पादन कर चुकी हैं।
वर्तमान में उनकी बाड़ी में करेला, तोरई, परवल और बरबट्टी जैसी फसलें लहलहा रही हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से सब्जियों की गुणवत्ता, आकार और ताजगी बेहतर हुई है, जिससे स्थानीय हाट-बाजारों में इनकी अच्छी मांग है।
बिचौलियों से मुक्ति और बेहतर आमदनी
फुलमती दीदी अब सब्जियों को क्रेट्स में व्यवस्थित कर सीधे बाजार पहुंचाती हैं। मध्यस्थों (बिचौलियों) के हटने से उन्हें अपनी उपज का पूरा और सही दाम मिल रहा है। त्योहारों और नवरात्रि के मौसम में ताजी सब्जियों की मांग बढ़ने से उनकी फसल तुरंत बिक जाती है, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।
परिवार का संवर रहा भविष्य
फुलमती दीदी का कहना है कि क्लस्टर से जुड़ने के बाद उनकी खेती की लागत घटी है और पैदावार में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। इस अतिरिक्त कमाई से वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य का भी बेहतर ध्यान रख पा रही हैं। ईरिकपाल की यह सफलता बस्तर की अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी आधुनिक खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का नया मार्ग दिखा रही है।
















