सोनमणि बोरा ने दिए समयबद्ध और पारदर्शी कार्यशैली के निर्देश; नशे के खिलाफ अभियानों में तेजी पर बल

दुर्ग। दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में दुर्ग जिला मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले में चल रही बुनियादी विकास योजनाओं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति का बारीकी से आकलन किया गया।
प्रमुख सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शासकीय तंत्र में आधुनिक तकनीक, संवेदनशीलता और आपसी समन्वय को प्राथमिकता दी जाए, ताकि योजनाओं का सीधा और त्वरित लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
प्रशासनिक दक्षता, राजस्व और आवास योजनाओं पर कड़े निर्देश
बैठक के दौरान श्री बोरा ने सार्वजनिक सेवाओं और राजस्व से जुड़े मुद्दों के त्वरित निपटारे के लिए दिशानिर्देश जारी किए:
राजस्व प्रकरणों का निवारण: तहसीलों एवं ग्राम पंचायतों में नामांतरण और बंटवारे के एक साल से अधिक पुराने लंबित मामलों का पारदर्शी और शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।
पीएम आवास योजना: पात्र लाभार्थियों को भूमि पट्टा एवं आवश्यक दस्तावेज समय पर वितरित करने और लंबित प्रकरणों को तुरंत सुलझाने के निर्देश दिए गए।
बुनियादी सुविधाएं: शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों (विशेषकर आंगनबाड़ियों और विद्यालयों) में बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं प्राथमिकता से पूरी की जाएं।
क्रॉस-लर्निंग व स्टडी टूर: जिला पंचायत और नगरीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों के अध्ययन प्रवास (Study Tour) आयोजित करने का सुझाव दिया गया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण का दायरा
जनस्वास्थ्य और शैक्षणिक ढांचे में सुधार के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: पीएमश्री एवं आत्मानंद मॉडल स्कूलों में स्वच्छता, पेयजल और विद्युत जैसी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। आरटीई (RTE) के तहत जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर जोर दिया गया।
आयुष्मान वय वंदना योजना: 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के कार्ड बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए ताकि उन्हें कैशलेस इलाज का लाभ मिल सके।
स्वास्थ्य अभियान: कुष्ठ रोग, सिकलसेल और टीबी-मुक्त अभियानों के तहत जारी जांच एवं उपचार की स्थिति का जायजा लिया गया।
शहरी अधोसंरचना व रैनबसेरे: रैनबसेरों की स्थिति सुधारने तथा पीएम आवास क्षेत्रों में कम्युनिटी हॉल, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैठने की व्यवस्था और जल निकासी प्रणाली बेहतर करने को कहा गया।
नारकोटिक्स पर नकेल और जनजागरूकता पर ध्यान
नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर भी बैठक में व्यापक रणनीति पर चर्चा हुई:
सख्त कार्रवाई: एनडीपीएस मामलों में तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने और अवैध व्यापार पर पूर्ण अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
जागरूकता अभियान: युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और व्यावसायिक संस्थानों में नुक्कड़ नाटक, चित्रकला प्रतियोगिताएं और टोल-फ्री नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया।
पुनर्वास व काउंसलिंग: नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के इलाज, पुनर्वास और काउंसलिंग की समुचित व्यवस्था पर बल दिया गया।
नारकोटिक्स कार्रवाई के आंकड़े (जिले की स्थिति):
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष एनडीपीएस के तहत की गई 107 कार्रवाइयों की तुलना में इस वर्ष 157 कार्रवाइयां की गईं, जिसमें गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 262 से बढ़कर 330 हो गई है। वहीं, जब्त मादक पदार्थों का मूल्य 1.40 करोड़ रुपये से बढ़कर 10.88 करोड़ रुपये पहुंच गया है। संवेदनशील इलाकों (जैसे भिलाई-दुर्ग और कुम्हारी) में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस समीक्षा बैठक में वन मंडलाधिकारी श्री सी.पी. अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, एडीएम श्री विरेन्द्र सिंह, भिलाई निगम आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह, दुर्ग निगम आयुक्त सुश्री लीना कोसम, रिसाली निगम आयुक्त श्रीमती मोनिका वर्मा और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
















