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गाजियाबाद जासूसी कांड : ISI नेटवर्क की बढ़ी मुश्किलें, अब NIA संभालेगी विदेशी फंडिंग और वीडियो लीक मामले की कमान

गाजियाबाद (एजेंसी)। गाजियाबाद के कौशांबी से शुरू हुआ जासूसी नेटवर्क का मामला अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस नेटवर्क के तार न केवल सीमा पार पाकिस्तान से, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों से भी जुड़े पाए गए हैं। मामले की गंभीरता और करोड़ों रुपये की संदिग्ध विदेशी फंडिंग को देखते हुए, अब इस जांच को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

विदेशी फंडिंग का बड़ा जाल: 53 खातों में आए करोड़ों रुपये

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की तफ्तीश में चौंकाने वाले वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं:

फंडिंग: जांच के दौरान कुल 53 बैंक खातों की पहचान की गई है, जिनमें लगभग 1.27 करोड़ रुपये विदेश से भेजे गए।

प्रमुख क्षेत्र: ये खाते मुख्य रूप से पंजाब, पश्चिम बंगाल और बिहार में एक्टिव थे।

सबसे बड़ी रकम: आर्थिक ट्रांजेक्शन का सबसे बड़ा केंद्र बिहार का भागलपुर जिला पाया गया है, जहाँ के एक खाते में सबसे अधिक धनराशि जमा की गई।

रेलवे की संवेदनशील फुटेज पाकिस्तान भेजी गई

जांच में एक और खतरनाक खुलासा हुआ है। सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगे कैमरों की मदद से ट्रेनों की आवाजाही की 8 घंटे की लाइव रिकॉर्डिंग तैयार की गई थी। विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि इस डेटा को सफलतापूर्वक पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजा गया। यह ट्रेनों के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध लगाने की कोशिश मानी जा रही है।

गिरफ्तारी और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

इस नेटवर्क का विस्तार पाकिस्तान के अलावा यूके (UK), मलेशिया और सऊदी अरब तक फैला हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक इस कार्रवाई में निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

हिरासत: गाजियाबाद और हापुड़ से अब तक 29 संदिग्धों को पकड़ा गया है, जिनमें 6 नाबालिग भी शामिल हैं।

मुख्य गिरफ्तारियां: मार्च महीने में सुहैल मलिक, साने इरम और समीर उर्फ शूटर जैसे आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ।

साक्ष्य: आरोपियों के मोबाइल से कई प्रतिबंधित चैट, फोटो और संवेदनशील स्थानों के वीडियो बरामद किए गए हैं।

सोशल मीडिया बना जासूसी का जरिया

जांच के अनुसार, यह नेटवर्क करीब 2 साल से सक्रिय था। इसकी शुरुआत 2023 में हुई जब मुख्य आरोपी समीर उर्फ शूटर ने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट कीं। इन तस्वीरों के जरिए अन्य आरोपी उससे जुड़े और फिर उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे ‘सरफराज’ नामक हैंडलर के निर्देशों पर काम दिया जाने लगा।

डीसीपी सिटी, धवल जायसवाल का बयान:

“मनी ट्रेल और डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच की जा रही है। विदेशी फंडिंग के मजबूत सबूत मिलने के कारण अब यह मामला NIA को ट्रांसफर किया जा रहा है ताकि इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की जड़ तक पहुंचा जा सके।”

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