बस्तर में सुशासन : बीजापुर के दूरदराज गाँवों को मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं ‘बेली ब्रिज’, सीएम साय ने परखा विकास

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जिन अंदरूनी इलाकों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ कभी प्रगति के रास्ते का रोड़ा बनी हुई थीं, वहाँ अब आधुनिक बुनियादी ढांचा बदलाव की नई इबारत लिख रहा है।
राज्य में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बीजापुर जिले के सुदूर आदिवासी अंचल कोण्डापल्ली पहुँचे। यहाँ उन्होंने बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर बने नए बेली ब्रिज का बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने पुल की निर्माण शैली, उसकी उपयोगिता और स्थानीय ग्रामीणों के जीवन पर पड़ने वाले इसके असर की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने इस पुल को बस्तर में आ रहे सकारात्मक बदलाव का एक बड़ा उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि सड़कें और पुल केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये दूरस्थ अंचलों तक शिक्षा, बेहतर इलाज और रोजगार के अवसर पहुँचाने वाले सशक्त मार्ग हैं। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही है कि विकास का लाभ हर हाल में अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे।
कम बजट और कम समय में टिकाऊ निर्माण
सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा तैयार किया गया यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क संपर्क का एक बेहद अहम हिस्सा है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि पारंपरिक पुलों के मुकाबले बेली ब्रिज तकनीकी रूप से काफी किफायती और मजबूत होते हैं। इन्हें सामान्य पुलों की तुलना में महज पांचवे हिस्से (80% कम) की लागत में और सिर्फ एक महीने के भीतर तैयार किया जा सकता है। मुश्किल और संवेदनशील इलाकों में तुरंत कनेक्टिविटी देने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हुई है।
बीजापुर के 21 पुलों से बदला इलाका
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बीजापुर जिले में अब तक ऐसे 21 बेली ब्रिजों का जाल बिछाया जा चुका है। इन पुलों की वजह से अब अंदरूनी गाँवों के लोगों का सफर आसान हो गया है। ग्रामीणों को अस्पताल, स्कूल और आपातकालीन सेवाओं के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से भी बातचीत की और उनके अनुभवों को जाना। उन्होंने कहा कि प्रदेश की तरक्की का असली श्रेय इन मेहनती श्रमिकों और युवाओं को ही जाता है।
विश्वास और प्रगति की नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे के इस कायाकल्प से पूरे बस्तर में नई उम्मीदें जगी हैं। कोण्डापल्ली का यह पुल सिर्फ दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि यह जनता के बीच सरकार के प्रति विश्वास और सुशासन की नई मिसाल है। यह बस्तर के उस नए स्वरूप को दिखाता है जहाँ विकास अब चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर सुदूर जंगलों और पहाड़ों को पार कर गाँवों तक पहुँच रहा है।
















