सूरजपुर के थाड़पाथर में ‘महतारी सदन’ का भव्य उद्घाटन, महिला सशक्तिकरण को मिलेगी नई उड़ान

₹24.70 लाख की लागत से तैयार हुआ सर्वसुविधायुक्त महिला केंद्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत थाड़पाथर को एक बड़ी सौगात मिली है। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने लगभग 24.70 लाख रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक ‘महतारी सदन’ का आधिकारिक लोकार्पण किया। यह नवनिर्मित परिसर ग्रामीण अंचल की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने, हुनर सिखाने और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के मुख्य उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस है नया परिसर
महिलाओं की हर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस परिसर को डिजाइन किया गया है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
विशाल हॉल और कार्य क्षेत्र: बैठकों और कार्यक्रमों के लिए बड़ा हॉल।
व्यावसायिक स्थान: दुकान संचालन के लिए समर्पित स्थान और कार्यालय कक्ष।
अन्य सुविधाएं: स्टोर रूम, रसोई घर (किचन) और परिसर के पीछे सामुदायिक शौचालय।
“महतारी सदन केवल भवन नहीं, नारी सम्मान का प्रतीक”: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश को महिला-केंद्रित विकास के एक मॉडल के रूप में विकसित कर रही है।
“यह सदन महज़ एक ईंट-गारे की इमारत नहीं है, बल्कि हमारी माताओं और बहनों के स्वाभिमान, सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह केंद्र पूरे राज्य की तरक्की का आधार स्तंभ बनेगा और ग्रामीण महिलाओं में शिक्षा, कौशल व उद्यमिता के नए आयाम स्थापित करेगा।”
स्व-सहायता समूहों से जुड़कर मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
राज्य सरकार की योजना इन सदनों को महिला स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups) की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने की है। यहाँ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाएंगे:
तकनीकी व डिजिटल ज्ञान: डिजिटल साक्षरता और आधुनिक तकनीक से जोड़ना।
पारंपरिक व हस्तशिल्प कौशल: सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और हस्तशिल्प।
कृषि व खाद्य प्रसंस्करण: कृषि-आधारित उत्पाद और फूड प्रोसेसिंग ट्रेनिंग।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल ग्रामीण महिलाओं को नेतृत्व, उत्पादन और उत्पाद विपणन (Marketing) के लिए एक सुरक्षित और स्थायी मंच प्रदान करेगी।
ग्रामीण महिलाओं में खुशी की लहर
लोकार्पण के दौरान उपस्थित स्थानीय महिलाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उनका कहना है कि अब बैठकों, ट्रेनिंग और स्वरोजगार गतिविधियों के लिए गांव में ही एक सुरक्षित स्थान मिल गया है, जिससे उनकी सहभागिता और आत्मनिर्भरता को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
















