संविधान और लोकतंत्र पर बढ़ रहा खतरा : मल्लिकार्जुन खरगे

नई दिल्ली (एजेंसी)। राजधानी दिल्ली में विपक्षी खेमे के प्रमुख गठबंधन ‘INDIA’ की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित गठबंधन के तमाम घटक दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक का आगाज करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने शुरुआती संबोधन में केंद्र सरकार के कामकाज के तरीकों और उसकी नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने देश के मौजूदा हालातों को देखते हुए सभी विपक्षी ताकतों को और अधिक मुस्तैदी से एकजुट होने की जरूरत पर बल दिया।
गठबंधन के तीन साल और संसद में एकजुटता का सफर
सभी सहयोगी दलों के नेताओं का स्वागत करते हुए खरगे ने याद दिलाया कि ‘INDIA’ गठबंधन के गठन को अब करीब तीन साल का वक्त हो चुका है। इस दौरान विपक्ष ने जनहित के कई बड़े मुद्दों पर मिलकर आवाज उठाई है। उन्होंने लोकसभा में बीते 17 अप्रैल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रस्ताव लेकर आई थी, तब पूरे विपक्ष ने एक सुर में इसका पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि आज ठीक वैसी ही चट्टानी एकता को और आगे ले जाने की जरूरत है।
लोकतंत्र, मताधिकार और स्वायत्त संस्थाओं पर मंडराता संकट
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्तमान में देश राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चों पर कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की आड़ में करोड़ों नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर हमारे संविधान पर प्रहार है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोधियों को डराने और दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
आर्थिक बदहाली: महंगाई, बेरोजगारी और सिकुड़ते कारोबार का मुद्दा
देश की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए विपक्षी नेताओं ने कहा कि आम जरूरत की चीजों के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की रफ्तार बेहद सुस्त है। बाजार में नया निवेश नहीं आ रहा है और देश की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) इस वक्त सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में निजी कंपनियों का एकाधिकार (Monopoly) बढ़ता जा रहा है, जिससे छोटे कारोबारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में धांधली पर आक्रोश
बैठक में देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा गया कि इससे देश के लाखों होनहार युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। व्यवस्था की इन कमियों के कारण युवाओं का भरोसा टूट रहा है, जो कि सरासर नाइंसाफी है।
कमजोर विदेश नीति और सामाजिक ताने-बाने पर चोट
अंतरराष्ट्रीय मामलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब अपने पुराने और स्थापित सिद्धांतों से भटकती हुई नजर आ रही है। इसके अलावा, उन्होंने समाज के वंचित और कमजोर तबकों पर बढ़ते अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई राज्यों में सामाजिक न्याय और संवैधानिक मर्यादाओं को सरेआम चुनौती दी जा रही है।
सामूहिक फैसले से तय होगी आगे की राह
संबोधन के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने गठबंधन के सभी नेताओं से अपनी-अपनी राय और सुझाव साझा करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बैठक में होने वाले सामूहिक मंथन के बाद ही विपक्ष मिलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के आगामी सत्र और भविष्य के बड़े सियासी घटनाक्रमों के लिहाज से ‘INDIA’ गठबंधन की यह बैठक बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।
















