अल्टीमेटम के साथ अतिथि शिक्षकों ने खत्म किया प्रदर्शन, 5 सितंबर के बाद फिर मोर्चा खोलने की चेतावनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 24 दिनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों ने आखिरकार अपना आंदोलन वापस ले लिया है। दुर्ग में धरना दे रहे शिक्षकों के संगठन ने शुक्रवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान हड़ताल समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा की। हालांकि, संगठन ने कड़े शब्दों में साफ किया है कि यदि शासन ने उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं निकाला, तो 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के बाद राज्य स्तर पर दोबारा बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
इन प्रमुख मांगों को लेकर था विरोध
अतिथि शिक्षक लंबे समय से संविलियन, 12 महीने का नियमित मानदेय, समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा और महिला शिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश की सुविधा जैसी मांगों पर अड़े हुए थे। अपनी बात सरकार तक पहुँचाने के लिए आंदोलनकारियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के आवास का घेराव भी किया था।
प्रशासनिक रुख और 27 जुलाई की समय-सीमा
हड़ताल को देखते हुए राज्य शासन और लोक शिक्षण संचालनालय ने सख्त रवैया अपनाया। विभाग का मानना था कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही शिक्षकों की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। इसके बाद सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और शाला प्रबंधन समितियों को कड़े निर्देश जारी किए गए।
निर्देशों के मुताबिक, हड़ताली अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई तक अपने-अपने स्कूलों में काम पर लौटने के आदेश दिए गए हैं। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि तय समय-सीमा तक ड्यूटी जॉइन न करने वाले शिक्षकों की सेवा नियम के तहत तुरंत समाप्त कर दी जाएगी और उनकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
पढ़ाई होगी बहाल, पर अनिश्चितता बरकरार
सरकार की चेतावनी और प्रशासनिक कड़ाई के बाद शिक्षकों ने फिलहाल काम पर लौटने का मन बना लिया है, जिससे सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन की प्रक्रिया दोबारा पटरी पर लौटने की उम्मीद है। फिर भी, शिक्षकों के अल्टीमेटम ने विभाग के सामने भविष्य की चुनौती बरकरार रखी है।
















