ईरान-अमेरिका ऐतिहासिक समझौता : कूटनीति की नई शुरुआत और वैश्विक चिंताएं

एवियन (एजेंसी)। लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करते हुए ईरान और अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक वर्चुअल बैठक के माध्यम से इस द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दिया। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप फ्रांस में थे, जहाँ फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे। व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ डैन स्कैविनो ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वर्सेल्स में आयोजित एक रात्रिभोज से पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उपस्थिति में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
इस कूटनीतिक कदम की सराहना करते हुए रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने वह कर दिखाया जिसे लोग नामुमकिन मान रहे थे। इस समझौते से ईरान की सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पहली बार अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए सहमत हुआ है, लेकिन इस समझौते की सफलता ‘भरोसे’ से ज़्यादा ‘कड़े निरीक्षण और सत्यापन’ पर टिकी होगी।
समझौते के वित्तीय पहलू और क्षेत्रीय चिंताएं
अमेरिकी मीडिया संगठन ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ के अनुसार, इस शांति समझौते के कारण ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील मिलेगी और विदेशों में जमी उसकी अरबों डॉलर की संपत्ति (अनफ्रीज्ड फंड्स) तथा तेल व्यापार का रास्ता साफ होगा।
हालांकि, इस वित्तीय राहत को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस धन का एक हिस्सा लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों को मजबूत करने में जा सकता है। राजनयिक सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान ने हिज्बुल्लाह को जल्द ही वित्तीय मदद पहुंचाने का भरोसा दिया है, जिससे वे अपनी राजनीतिक और सैन्य स्थिति को फिर से खड़ा कर सकें।
खुद हिज्बुल्लाह के संचार विभाग ने स्वीकार किया है कि ईरान उन्हें लगातार आर्थिक और रणनीतिक समर्थन देता रहा है, जिसमें पिछले साल दी गई करीब एक अरब डॉलर की राशि भी शामिल है। संगठन का कहना है कि नए समझौते की शर्तों से इतर, ईरान की ओर से उन्हें मिलने वाली मदद जारी रहेगी।
अमेरिका का रुख और सख्त चेतावनी
इस पूरे मामले पर वाशिंगटन ने अपना रुख बेहद कड़ा रखा है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान इस मुक्त की गई धनराशि का उपयोग किसी भी प्रकार की हिंसक या आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए नहीं कर सकता। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने समझौते की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया, तो उसकी संपत्तियों को दोबारा तुरंत फ्रीज (जब्त) कर दिया जाएगा।
















